Census 2027: जनगणना 2027 के दूसरे चरण के तहत सोमवार से केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड के बर्फबारी प्रभावित गैर-समकालिक क्षेत्रों में 15 दिवसीय स्व-गणना प्रक्रिया शुरू हो गई। यह प्रक्रिया 31 अगस्त तक जारी रहेगी।
स्व-गणना, घर-घर जाकर जनसंख्या गणना शुरू होने से पहले की प्रक्रिया है। इसके तहत नागरिक आधिकारिक वेब पोर्टल के माध्यम से अपने परिवार और व्यक्तिगत जानकारी स्वयं ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। यानी उन्हें गणना कर्मी के घर पहुंचने का इंतजार नहीं करना होगा। जनगणना 2027 भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी। इसमें डिजिटल माध्यम से आंकड़े जुटाए जाएंगे और नागरिकों को स्व-गणना की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
इन क्षेत्रों में वास्तविक जनसंख्या गणना 1 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक होगी। इसके बाद 1 अक्टूबर से 5 अक्टूबर 2026 तक पांच दिवसीय संशोधन चरण आयोजित किया जाएगा। देश के अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में होगी। गृह मंत्रालय ने 3 अगस्त को जनगणना 2027 के दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना (Population Enumeration) को लेकर अधिसूचना जारी की थी। इसके मुताबिक लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड के बर्फबारी प्रभावित गैर-समकालिक क्षेत्रों में जनसंख्या गणना 1 से 30 सितंबर तक होगी।
इन अधिसूचित क्षेत्रों के लिए जनगणना की संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर 2026 की रात 12 बजे निर्धारित की गई है। वहीं, स्व-गणना की सुविधा 17 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक उपलब्ध रहेगी। गृह मंत्रालय ने 14 अगस्त को 40 सवालों की सूची भी अधिसूचित की थी। इन सवालों के माध्यम से हर व्यक्ति से परिवार और जनसांख्यिकीय जानकारी जुटाई जाएगी।
जाति समेत जुटाई जाएगी जानकारी-
जनगणना के दौरान नाम, परिवार के मुखिया से संबंध, लिंग, जन्म तिथि, आयु, वैवाहिक स्थिति, विवाह की आयु, पति या पत्नी का नाम, राष्ट्रीयता, धर्म, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और जाति से संबंधित जानकारी ली जाएगी।
इसके अलावा माता-पिता की जानकारी, दिव्यांगता, मातृभाषा, अन्य ज्ञात भाषाएं, साक्षरता और डिजिटल साक्षरता, शिक्षा, रोजगार, व्यवसाय, आर्थिक गतिविधि, उद्योग, व्यापार या सेवा, काम की प्रकृति और कार्यस्थल तक यात्रा से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी। जन्म स्थान, पिछला निवास स्थान, प्रवास का कारण, प्रवास की अवधि, स्थायी निवास का पता और महिलाओं से संबंधित कुछ विशेष जानकारी भी प्रश्नावली में शामिल है।
इसके अलावा कोविड-19 टीकाकरण का स्थान, बैंक खातों की संख्या, मोबाइल नंबर, आधार नंबर, मतदाता पहचान पत्र, भारतीय पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस की उपलब्धता से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे।
पहली बार व्यापक जाति जनगणना-
जाति जनगणना 2027 की प्रमुख विशेषताओं में से एक है। प्रश्नावली में जाति को 10वें सवाल के रूप में शामिल किया गया है। स्वतंत्रता के बाद यह पहली जनगणना होगी जिसमें व्यापक स्तर पर जाति की गणना की जाएगी। वर्ष 2011 की जनगणना तक व्यवस्थित रूप से केवल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित आंकड़े जुटाए जाते थे। जाति जनगणना को शामिल करने का फैसला 30 अप्रैल 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की राजनीतिक मामलों की समिति (CCPA) ने लिया था।
दो चरणों में होगी जनगणना-
जनगणना 2027 को दो चरणों में कराया जा रहा है। पहले चरण में मकान सूचीकरण एवं आवास जनगणना (House Listing and Housing Census) और दूसरे चरण में जनसंख्या गणना शामिल है। पहला चरण इस साल अप्रैल में शुरू हुआ था और 31 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में पूरा हो चुका है। बाकी राज्यों में यह चरण सितंबर 2026 तक पूरा किया जाना है।
मकान सूचीकरण चरण में आवास की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और परिवारों के पास मौजूद परिसंपत्तियों की विस्तृत जानकारी जुटाई जाती है। इसके साथ ही दूसरे चरण की जनसंख्या गणना के लिए आवश्यक आधार तैयार किया जाता है।
11,718 करोड़ रुपये से अधिक का बजट-
केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। इसमें जनगणना कर्मियों के मानदेय और प्रशिक्षण, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर तथा लॉजिस्टिक्स के लिए प्रावधान किया गया है। जनगणना 2027 देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, 7,092 उप-जिलों, 5,128 वैधानिक नगरों, 4,580 जनगणना नगरों और करीब 6,39,902 गांवों को कवर करेगी।