BJP New Team: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में अपनी नई टीम का ऐलान किया। नई टीम में कई नए चेहरों को जगह दी गई है और इसमें अनुभव तथा युवा नेतृत्व का संतुलन देखने को मिला है। महिलाओं को भी महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व दिया गया है, बीएल संतोष राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) के पद पर बने रहेंगे।
अमेठी की पूर्व सांसद स्मृति ईरानी, त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब, सुनील बंसल, विनोद तावड़े, गजेंद्र पटेल, सतीश पूनिया, हरीश द्विवेदी और संजय भाटिया को राष्ट्रीय महासचिव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। नितिन नबीन के करीब छह महीने पहले पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद यह नई टीम घोषित की गई है।
पार्टी ने कई वरिष्ठ नेताओं को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया है। इनमें राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, राम माधव, बैजयंत पांडा, डी. पुरंदेश्वरी, रेखा वर्मा, वर्षाबेन नरेंद्रभाई दोशी, भारती प्रवीन पवार, मनप्रीत सिंह बादल, लाल सिंह आर्य, प्रो. एम. नागराजा, प्रो. तारिक मंसूर और मधुचंद्र कर शामिल हैं। 13 नए राष्ट्रीय उपाध्यक्षों में छह महिलाएं हैं।
राष्ट्रीय सचिवों की सूची में कविता पाटीदार (मध्य प्रदेश), के. सुरेंद्रन (केरल), डॉ. भोला सिंह (उत्तर प्रदेश), प्रदीप वर्मा (झारखंड), जगदीश ईश्वरभाई पटेल (गुजरात), संदीप पाठक (दिल्ली), फांगनोन कोन्याक (नागालैंड), संगीता यादव (उत्तर प्रदेश), अनिल एंटनी (केरल), एम. वेंकटेशन (तमिलनाडु), मनोज तिग्गा (पश्चिम बंगाल), सिद्धार्थ शंभू (बिहार), स्वदेश सिंह (दिल्ली), मृगांका देव बर्मन (असम), रोहन गुप्ता (गुजरात) और जय प्रकाश (दिल्ली) को शामिल किया गया है।
पीयूष गोयल को एक बार फिर पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी ने राज्यसभा सांसद तरुण चुग को केंद्रीय कार्यालय प्रभारी नियुक्त किया है। गुजरात के सांसद हेमंग जोशी को युवा मोर्चा की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि छत्तीसगढ़ की रूप कुमारी चौधरी महिला मोर्चा की कमान संभालेंगी।
लोकसभा सांसद अनिल बलूनी मीडिया संयोजक के पद पर बने रहेंगे। मध्य प्रदेश के आशीष उषा अग्रवाल, दिल्ली के प्रदीप भंडारी और दिल्ली के सिद्धार्थ यादव को सह-संयोजक बनाया गया है। छत्तीसगढ़ के दीपक म्हास्के को सोशल मीडिया संयोजक नियुक्त किया गया है। नितिन नबीन की नई टीम के सामने 2027 में बड़ी चुनौती होगी, जब उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में हुए इन बदलावों से केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल का रास्ता भी साफ हो सकता है।