Pitru Paksha: पूजा-पाठ और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ हुआ पितृ पक्ष का समापन, देशभर के मंदिरों और घाटों पर सुबह से लगा श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ था। पूर्वजों को याद करने और उनका सम्मान करने का 15 दिनों का पितृ पक्ष आज समाप्त हो गया। इस दौरान देशभर के प्रमुख घाटों और तीर्थ स्थलों पर लोगों ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पूजा-पाठ और धार्मिक रस्में निभाईं।
हिंदू पंचांग के आश्विन महीने में पितृ पक्ष का समापन ‘महालय अमावस्या’ के दिन होता है। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में पितृ पक्ष के समापन पर श्रद्धालु सुबह से ही संगम पर पहुंचे। लोगों ने पवित्र स्नान किया और अपने पूर्वजों की याद में विशेष पूजा-पाठ किया। स्थानीय पुजारियों के मुताबिक, इन धार्मिक रस्मों के जरिए लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनका सम्मान करते हैं। साथ ही, इससे परिवारों में पीढ़ियों से चली आ रही परंपराएं भी बनी रहती हैं।
पुजारी गोपाल जी महाराज ने बताया कि “पितृों का जो 15 दिन का पर्व था आज समाप्त हो गया। अब आगे जितने भी हमारे सनातनी धर्मे हैं हिंदू भाई लोग हैं, अपने माता पिता, नाना-नानी के नाम से संगम पर नहाने के बाद पिंड दान करेंगे, गुणदान करेंगे, अन्न दान करेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य ये है कि हम अपने पूर्वजों को जाने पहचाने की हमारे पिता के पिता कौन थे, क्या थे उनको जानकर के अंदर भावना और आदर का हम उनका सम्मान करें। ये हमारी उपलब्धि है मोक्ष प्रदान करके अपने मन को शांत करते हैं और हमारे घर पर शांति और समृद्धि होती है ये फायदा होता है।”))
रामनगरी अयोध्या में भी पितृ पक्ष के समापन पर श्रद्धालु सरयू नदी के किनारे इकट्ठा हुए। लोगों ने पूजा-पाठ किया और धार्मिक रस्में निभाईं। उत्तराखंड के हरिद्वार में पितृ पक्ष के आखिरी दिन श्रद्धालु नारायणी शिला मंदिर पहुंचे। लोगों ने यहां अपने पूर्वजों की याद में श्राद्ध, पिंडदान और धार्मिक रस्में निभाईं, यह दिन उन लोगों के लिए भी खास होता है, जो पहले पितरों की रस्में नहीं कर पाए थे। वे इस दिन अपने पूर्वजों के लिए पूजा-पाठ कर सकते हैं और पहले हुई किसी भी चूक के लिए क्षमा मांग सकते हैं।
नारायणी शिला मंदिर के मुख्य पुजारी मनोज त्रिपाठी ने बताया कि “किसी कारण वश त्रुटि हो गई हो श्राद्ध छूट गया हो, श्राद्ध न कर पाए हो या ऐसी कोई पिृत जिनकी तिथि का ज्ञान ही ना हो, तो आज के लिए 16 दिन के अंतिम दिन महालय पक्ष में पिृतों का पिंड दान श्राद्ध तृपण आदि करके अपने पितृों को आज विदा कर सकते हैं। अपनी गलतियों की क्षमा मांग सकते हैं आज पिृत विसर्जन के साथ ही पिृतों का आशीर्वाद परिवार में सुख सृमद्धि और आरोग्यता के रूप में प्राप्त कर सकते है।”
मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। देश के पूर्वी हिस्से में भी पितृ पक्ष के समापन पर श्रद्धालु बड़ी संख्या में जुटे। असम के नगांव और पश्चिम बंगाल के गंगासागर में लोगों ने मंदिरों और नदियों के किनारे पूजा-पाठ और धार्मिक रस्में निभाईं, पितृ पक्ष के समापन के अगले दिन यानी रविवार से नवरात्रि शुरू होने जा रहे हैं। इस दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा के अलग-अलग रूप की पूजा करेंगे, इसके साथ ही देश में त्योहारों का मौसम भी शुरू हो जाएगा।