Onion price: प्याज की कीमतें बढ़ रही हैं और देश भर की रसोई में इसका असर महसूस किया जा रहा है, इस बढ़ोतरी की वजह से 16 सितंबर तक प्याज की औसत खुदरा कीमत 53.92 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में प्याज की महंगाई दर बढ़कर लगभग 48 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में करीब 23 प्रतिशत थी।
मध्य प्रदेश के खुदरा विक्रेताओं का कहना है कि स्टॉक कम होने और अगली फसल के सीजन में अभी दो महीने से ज्यादा का समय बाकी होने की वजह से कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। इस बीच, प्याज उगाने वाले प्रमुख राज्य महाराष्ट्र में इस साल फसल को भारी नुकसान हुआ है। राज्य के प्याज उत्पादक संघ का कहना है कि किसान अपनी उपज घाटे में बेच रहे हैं और खेती की लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं।
अहमदाबाद में व्यापारियों का कहना है कि प्याज के थोक दाम लगभग दोगुने हो गए हैं। साथ ही, उनका कहना है कि नवरात्रि के बाद आने वाली नई फसल की गुणवत्ता ही तय करेगी कि आने वाले हफ्तों में दाम कैसे रहेंगे। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में प्याज की कीमतें 5,000 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर चली गई हैं। व्यापारी किसानों को सलाह दे रहे हैं कि वे नई फसल को तुरंत बाजार में न लाएं, बल्कि उसे सूखने और उसके बेहतर दाम मिलने के लिए लगभग 15 दिन तक इंतजार करें।
वे आगाह कर रहे हैं कि खराब गुणवत्ता की उपज से किसानों को कम दाम मिल सकते हैं और बाद की सप्लाई पर भी असर पड़ सकता है। तमिलनाडु में प्याज की बढ़ती कीमतों में परिवहन का खर्च भी एक वजह है, क्योंकि राज्य प्याज की सप्लाई के लिए महाराष्ट्र पर निर्भर है। खुदरा कीमतों में तेजी से हो रही बढ़ोतरी का असर घरों के बजट पर भी पड़ रहा है, जिससे लोग प्याज और दूसरी सब्जियों की खरीद कम कर रहे हैं।
जो चीज कभी हर खाने का अहम हिस्सा हुआ करती थी, वह अब रोजाना के राशन के बिल में एक महंगी चीज बनती जा रही है। अगली फसल आने में अभी कुछ हफ्ते बाकी हैं। ऐसे में नई फसल की आवक, उसकी गुणवत्ता और सप्लाई से ही यह तय होगा कि कीमतें कम होंगी या नहीं और ग्राहकों को कुछ राहत मिलेगी या नहीं।