NCERT: भारतीय लोकतंत्र के सबसे विवादास्पद अध्याय ‘आपातकाल‘ को अब स्कूली शिक्षा में पहले से अधिक महत्व दिया गया है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने नौवीं कक्षा की नई सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में आपातकाल पर विस्तृत अध्याय शामिल किया है। इस नई पुस्तक का नाम ‘Understanding Society: India and Beyond-Part 1’ है. इससे छात्र पहली बार इतनी कम उम्र में देश के इस महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के बारे में पढ़ सकेंगे।
अब तक आपातकाल का विषय मुख्य रूप से 11वीं और 12वीं कक्षा की राजनीतिक विज्ञान की पुस्तकों तक सीमित था। नई पुस्तक में 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल, उसके कारणों, प्रभावों और लोकतंत्र पर पड़े असर को विस्तार से समझाया गया है। पुस्तक में बताया गया है कि आपातकाल कब और क्यों लगाया गया था, यह कितने समय तक लागू रहा और इस दौरान नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर क्या प्रभाव पड़ा। छात्रों को यह भी पढ़ाया जाएगा कि लोकतंत्र में मीडिया और न्यायपालिका की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है।
जेपी आंदोलन और राजनीतिक पृष्ठभूमि
अध्याय में आपातकाल से पहले की परिस्थितियों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले जेपी आंदोलन, बढ़ती महंगाई, राजनीतिक अस्थिरता और विपक्षी दलों के आंदोलनों को आपातकाल की पृष्ठभूमि के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का जिक्र
किताब में उस ऐतिहासिक कानूनी घटनाक्रम को भी शामिल किया गया है, जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव को अमान्य घोषित किया था। माना जाता है कि इस फैसले के बाद देश की राजनीति में उथल-पुथल बढ़ी और इसके कुछ समय बाद आपातकाल लागू कर दिया गया।
21 महीने बाद हुई लोकतंत्र की वापसी
पाठ्यपुस्तक में बताया गया है कि करीब 21 महीने तक चले आपातकाल के बाद जनवरी 1977 में आम चुनाव कराने की घोषणा हुई। इसके बाद मार्च 1977 में हुए चुनावों में जनता ने अपना फैसला सुनाया और देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था की पूर्ण बहाली हुई।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा के अनुरूप तैयार की गई इस नई पुस्तक में भारतीय सभ्यता, सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक संस्थाओं के विकास को विशेष महत्व दिया गया है। NCERT का मानना है कि इससे छात्रों को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास और संवैधानिक मूल्यों को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिलेगा।