Nag Panchami: आज नाग पंचमी का पर्व, सावन के तीसरे सोमवार पर जानें जरूरी नियम

Nag Panchami: नाग पंचमी और सावन सोमवार का खास संयोग बन रहा है, सावन का सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है, वहीं नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा की जाती है। दोनों पर्व एक ही दिन होने के कारण इस दिन शिव पूजा और नाग देवता की आराधना का महत्व और बढ़ गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने और सावन सोमवार को भगवान शिव का जलाभिषेक करने से सुख-शांति, परिवार की सुरक्षा और समृद्धि की कामना की जाती है। श्रद्धालु इस दिन व्रत, पूजा, मंत्र जाप और दान-पुण्य कर सकते हैं।

सावन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। वहीं नाग पंचमी का संबंध भी भगवान शिव से माना जाता है, क्योंकि उनके गले में नाग विराजमान हैं। ऐसे में इस दिन शिव पूजा के साथ नाग देवता का स्मरण और पूजन करना भक्तों के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है।

 नाग पंचमी श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है और इस दिन नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग देवता का भगवान शिव से विशेष संबंध है। इसलिए इस दिन शिव पूजा के साथ नाग देवता का स्मरण करना भी शुभ माना जाता है। कई स्थानों पर नाग पंचमी के दिन नाग देवता को दूध अर्पित करने की परंपरा है। हालांकि, जीवित सांपों को दूध पिलाने से बचना चाहिए। इसके बजाय नाग देवता की प्रतिमा या तस्वीर की पूजा करना बेहतर है।

पूजा का शुभ मुहूर्त-

पंचांग के अनुसार, आज यानि 17 अगस्त को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:24 बजे से 05:08 बजे तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:51 बजे तक रहेगा। इन शुभ समय में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करना शुभ माना जाता है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार  नाग पंचमी को राहु-केतु और नाग से संबंधित दोषों की शांति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी वजह से कई लोग इस दिन नाग देवता की पूजा और भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प दोष या किसी अन्य ग्रह दोष का वास्तविक प्रभाव जानने के लिए व्यक्तिगत जन्मकुंडली का अध्ययन जरूरी होता है। केवल पर्व विशेष पर की जाने वाली सामान्य पूजा को किसी व्यक्ति की कुंडली का निश्चित उपचार नहीं माना जाना चाहिए।

 

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