Atal Bihari Vajpayee Death Anniversary : अटल जी का उत्तराखंड से था विशेष नाता,उत्तराखंड को दिया था अलग राज्य का दर्जा और विशेष औद्योगिक पैकेज

रिपोर्ट-नमिता बिष्ट

पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की आज चौथी पुण्यतिथि है। आज ही के दिन साल 2018 को उन्होंने लंबी बीमारी के बाद दुनिया को अलविदा कह दिया था। भारतीय राजनीति में अजातशत्रु की तरह याद किए जाने वाले अटल को आज पूरा देश श्रद्धांजलि दे रहा है। अटल जी की समाधि स्थल पर राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने श्रंद्धाजलि दी।  वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके साथ ही भाजपा प्रदेश कार्यालय में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कर अटल बिहारी वाजपेयी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।  

  कार्यकाल पूरा करने वाले पहले गैर-कांग्रेसी पीएम

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म मध्यप्रदेश के ग्वालियर के मध्य वर्गीय ब्राह्मण परिवार में 25 दिसंबर 1924 में हुआ था। उन्होंने राजनीति में रहते हुए एक विशिष्ट और सराहनीय मुकाम को हासिल किया था। अटल जी देश के तीन बार प्रधानमंत्री बने। वह ऐसे पहले भारतीय प्रधानमंत्री भी थे, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण देने का फैसला किया। वहीं अटल बिहारी वाजपेयी ने लालकृष्ण आडवाणी के साथ 1980 में भारतीय जनता पार्टी की नींव रखी थी। वह प्रधानमंत्री के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा करने वाले पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री रहे थे।

उत्तराखंड को विशेष राज्य का दर्जा

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का देवभूमि उत्तराखंड के साथ भी गहरा लगाव था। उत्तराखंड को अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में लाने में अटल जी का अहम योगदान रहा है। उन्होंने ही उत्तराखंड को विशेष राज्य का दर्जा दिया था। उनके इस योगदान को कोई भी उत्तराखंडी भुला नहीं सकता।

आंदोलनकारियों को दिलाया था आश्वासन

 बता दें कि अलग राज्य की मांग को लेकर जब उत्तराखंड (तब उत्तर प्रदेश) में आंदोलन चल रहा था उस वक्त अटल बिहारी वाजपेयी देहरादून आए थे। उस दौरान कई आंदोलनकारियों ने उनसे मुलाकात कर अलग राज्य की मांग की। तब उन्होंने आंदोलनकारियों को जल्द ही इस पर फैसला लेने का भरोसा दिलाया था। वहीं उनका भरोसा कायम रखते हुए साल 2000 में उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ।

औद्योगिक पैकेज देने की सौगात

अटल जी ने उत्तराखंड को अलग राज्य का दर्जा देने के साथ ही पर्वतीय राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया। मार्च 2002 में अटल जी जब नैनीताल दौरे पर आए थे तब उत्तराखंड राज्य को विशेष औद्योगिक पैकेज देने की घोषणा की थी। इसके बाद साल 2003 से उत्तराखंड में विशेष पैकेज को लागू किया गया। बता दें कि उत्तराखंड को 10 साल के लिए दिए गए औद्योगिक पैकेज में निवेश करने पर उद्यमियों को एक्साइज ड्यूटी में शत प्रतिशत छूट के साथ 5 साल तक आयकर में छूट आदि तमाम सुविधाएं दी गईं। जिस कारण उद्योगपति करोड़ों का निवेश करने के लिए आगे आए। राज्य के अस्तित्व में आने से पहले जहां सिर्फ एक ही बड़ा उद्योग स्थापित था। वहीं इस पैकेज के बाद बड़े उद्योगों में करोड़ों का पूंजी निवेश किया गया।

राजनीति के साथ… प्रभावी कवि

अटल बिहारी वाजपेयी यह एक नाम मात्र नहीं है, बल्कि खुद में एक युग, राजनीति का एक दौर और एक संस्कृति है। अटलजी जितने ओजस्वी राजनेता थे उतने ही प्रभावी कवि भी थे। उनको कविताओं से खासा लगाव रहा। वह अपने विचारों को कई बार कविताओं के माध्यम से ही सामने रखते थे। उनका कहना था कि कविता उनके लिए जंग में हार नहीं, बल्कि जीत की घोषणा की तरह है।

बता दें कि उनकी कविता आज भी जीवन के मूल्यों को संजोए हुए है। अटलजी ने अपने जीवन की पहली कविता “पन्द्रह अगस्त का दिन कहता है, आजादी अभी अधूरी है”, 15 अगस्त 1947 के दिन ही कानपुर डीएवी कॉलेज के छात्रावास के कमरा नंबर 104 में लिखी थी।

स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना की शुरु

राजनीति के पुरोधा रहे अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत के चारों कोनों को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए सड़क मार्गों के विस्तार के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना को शुरु किया था। उनके कार्यकाल में भारत में इतनी सड़कों का निर्माण हुआ जितनी शेरशाह सूरी के शासनकाल में हुआ था। उन्होंने 100 साल पुराने कावेरी जल विवाद को भी सुलझाया था।

देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित

अटल बिहारी वाजपेयी को कई बार सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें 1992 में पद्म विभूषण, 1994 में लोकमान्य तिलक पुरस्कार, श्रेष्ठ सांसद पुरस्कार और गोविंद वल्लभ पंत जैसे पुरस्कारों से नवाजा गया। उनको दिसम्बर, 2014 में देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से भी नवाजा गया। इनके जीवन से हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बड़े प्रभावित रहे हैं और अटल जी खुद श्यामा प्रसाद मुखेर्जी के प्रशंसक रहे हैं।

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