Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश में मंडला जिले के चोवा गांव में लोगों को दिन-रात जिस चीज का ख्याल रहता है, वो है पानी। यहां लोगों को बूंद-बूंद पानी के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ती है। गांव के ज्यादातर कुएं सूखे पड़े हैं। बोरवेल भी बहुत कम हैं।अक्सर यहां कुओं के आसपास बेचैन लोगों की जमात देखने को मिलती है। उनके सामने कुएं की तलहटी में बचे थोड़े- बहुत पानी को निकालने की चुनौती होती है। कोई एक शख्स जान पर खेल कर कुएं में उतरता है। बर्तनों में पानी भरता है। फिर उन्हें ऊपर खींचा जाता है।
ये काम बेहद जोखिम भरा है। अंधेरे कुएं में सांपों और चोट लगने का डर रहता है। इतनी मेहनत के बाद भी, कुएं की तलहटी में बचा पानी साफ नहीं होता। गांव वालों का कहना है कि उन्होंने प्रशासन से पानी की समस्या दूर करने के लिए बार-बार गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। वे लगातार नए और गहरे कुएं खोदने और बोरवेल लगाने की मांग कर रहे हैं। हालांकि गांव के सरपंच बताते हैं कि अधिकारियों के सामने ये मुद्दा उठाने के बाद थोड़ा-बहुत सुधार हुआ है। फिर भी वे मानते हैं कि ज्यादातर कुएं अब भी सूखे हैं और गांव की जरूरतें पूरी करने लायक नहीं हैं।
और जगहों पर पानी का संकट दूर करने के लिए कदम उठाए गए हैं, लेकिन चोवा में अब भी लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती साफ पानी तलाशना है।फिलहाल, गांव वालों के लिए उथले और सूखते हुए कुएं ही सहारा हैं। फिर भी उन्हें उम्मीद है कि अगली गर्मी तक हालात सुधरेंगे, नए कुएं खुदेंगे और गहरे बोरवेल लगाए जाएंगे।