Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में घोषणा की कि यूसीसी के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में 7 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।
इस समिति में पूर्व हाईकोर्ट न्यायाधीश आर.सी. चव्हाण और एस.जी. मेहरे, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव डी.के. जैन, पूर्व महाधिवक्ता बिरेंद्र सराफ, समाजसेवी पद्मश्री रमेश पतंगे और शिक्षाविद सुवर्णा रावल को शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि यह समिति अगले छह महीने में यूसीसी से जुड़े सभी कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन कर अपनी सिफारिशों के साथ रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। इसके आधार पर सरकार यूसीसी का मसौदा तैयार करेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश रहेगी कि नागपुर में होने वाले आगामी शीतकालीन सत्र में यूसीसी विधेयक को विधानसभा और विधान परिषद दोनों में पेश कर पारित कराया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस पूरी प्रक्रिया को संविधान और कानून के अनुसार आगे बढ़ाएगी, ताकि राज्य में समान नागरिक संहिता को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।
फडणवीस ने कहा कि समान नागरिक संहिता का विचार भारतीय संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में शामिल है। उनका कहना है कि डॉ. भीमराव आंबेडकर भी विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानून के पक्षधर थे। उत्तराखंड आजादी के बाद यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बन चुका है। वहीं, असम ने भी यूसीसी से जुड़ा विधेयक पारित किया है। महाराष्ट्र सरकार अब इन राज्यों के अनुभवों का अध्ययन करते हुए अपना मसौदा तैयार करेगी।