USA: संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिकी और क्यूबा के अधिकारियों के बीच तीखी बहस

USA:  संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिका और क्यूबा के अधिकारियों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। हवाना (क्यूबा) के खिलाफ वाशिंगटन के बढ़ते आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर, लंबे समय से एक-दूसरे के विरोधी रहे इन दोनों देशों के बीच सार्वजनिक टकराव
देखने को मिला। ये घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज़ ने मंच से बोलते हुए, इस द्वीप देश (क्यूबा) के खिलाफ अमेरिका द्वारा दशकों से लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों की निंदा करने वाले वार्षिक प्रस्ताव का समर्थन न करने की अपील की।

जब वाल्ट्ज समाजवादी सरकार द्वारा वर्षों से किए जा रहे कथित भ्रष्टाचार के बारे में बता रहे थे, तो क्यूबा के प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने अपनी मेज पर जोर-जोर से हाथ मारना शुरू कर दिया और ‘पॉइंट ऑफ ऑर्डर’ (नियमों के अनुसार बात रखने की मांग) के लिए चिल्लाने लगे। इसमें विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिग्ज भी शामिल थे। इसके बाद, जब संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने इस हंगामे को शांत करने की कोशिश की, तो रोड्रिग्ज़ गलियारे से होते हुए जनरल असेंबली के मुख्य मंच की ओर गए और वाल्ट्ज से चिल्लाकर बोले, “तुम झूठे हो!” इस पर वाल्ट्ज ने जवाब दिया, “क्या तुम्हें पता है कि तुम किससे बात कर रहे हो? ये अमेरिका है। पीछे हटो।”

हालांकि ये घटना संयुक्त राष्ट्र की पारंपरिक राजनयिक मर्यादा के बिल्कुल विपरीत और चौंकाने वाली थी, लेकिन इसने क्यूबा और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को पूरी तरह से उजागर कर दिया। दरअसल, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन क्यूबा पर पहले से ही भारी आर्थिक दबाव डालने वाले अपने अभियान को और तेज करके, वहां की राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए मजबूर करना चाहता है। कैरेबियाई देश पहले से ही लंबे समय से चली आ रही आर्थिक और वित्तीय परेशानियों का सामना कर रहा है और अब अब पूरी तरह से टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ऐसा तब हुआ जब रिपब्लिकन नेता ट्रंप ने जनवरी के आखिर में घोषणा की कि वो क्यूबा को तेल बेचने या उपलब्ध कराने वाले किसी भी देश पर शुल्क (टैरिफ) लगाएंगे।

इस चेतावनी के कारण द्वीप पर ईंधन की आपूर्ति लगभग बंद हो गई है, जिससे बड़े पैमाने पर बिजली कटौती हो रही है। इसका असर खाना पकाने, पानी की आपूर्ति और इंटरनेट और टेलीफोन जैसी बुनियादी सेवाओं पर पड़ रहा है। ये तीखी बहस वाल्ट्ज और उनके क्यूबाई समकक्ष अर्नेस्टो सोबेरोन गुजमैन के बीच एक हफ्ते पहले हुई बातचीत के बाद हुई है। ये बातचीत क्यूबा के असंतुष्टों और पूर्व कैदियों के साथ अमेरिकी पैनल के बाहर हुई थी, जिसमें द्वीप की सरकार के दमनकारी व्यवहार के आरोपों को उजागर करने की कोशिश की गई थी।

वाल्ट्ज और अन्य अमेरिकी अधिकारी संयुक्त राष्ट्र में होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रमों और बैठकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। वो सदस्य देशों को इस बात के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं कि वो बुधवार को होने वाले वार्षिक प्रस्ताव के खिलाफ वोट दें। ये प्रस्ताव क्यूबा के खिलाफ अमेरिकी सरकार की “अधिकतम दबाव नीति” (मैक्सिमम प्रेशर पॉलिसी) की आलोचना करने के उद्देश्य से लाया गया है।

पिछले 34 वर्षों से इस प्रस्ताव को भारी समर्थन मिलता रहा है। पिछले साल, इसके पक्ष में 165 और विपक्ष में 7 वोट पड़े थे, जबकि 12 देशों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया था। अर्जेंटीना, यूक्रेन और हंगरी ने पहली बार इस प्रस्ताव का विरोध किया। nहालांकि ऐसे प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होते, लेकिन ये दुनिया की राय को जरूर दर्शाते हैं।

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