US-Iran: अमेरिका-ईरान बातचीत के मध्यस्थों ने बताया कि स्विट्जरलैंड में ईरान युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए हो रही उच्च-स्तरीय बातचीत खत्म हो गई है, जबकि तकनीकी बातचीत पूरे हफ्ते जारी रहेगी, वहां मौजूद दो मध्यस्थों- पाकिस्तान और कतर ने एक बयान जारी कर ये जानकारी दी।
अमेरिका ने तुरंत इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। ईरान ने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई के जरिए सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए से कहा कि “अच्छी प्रगति हुई है”। ये बातचीत उस 60-दिवसीय प्रक्रिया में कूटनीति की शुरुआत है जिसका मकसद ईरान युद्ध पर एक स्थायी समझौता करना है। हालांकि लेबनान में इजराइल और ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह के बीच जारी लड़ाई कूटनीति के लिए खतरा बनी हुई है। इस बीच, ईरान ने जोर देकर कहा कि उसने सप्ताहंत पर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद कर दिया था। ये फारस की खाड़ी का वो संकरा रास्ता है जो ऊर्जा की आपूर्ति के लिए बहुत जरूरी है। वहीं, अमेरिका का कहना था कि वहां आवाजाही जारी रही। बातचीत की शुरुआत तनावपूर्ण रही, क्योंकि तेहरान को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हमले की धमकी और उनकी इस चेतावनी पर बुरा लगा कि ईरान के राष्ट्रपति को सोच-समझकर बोलना चाहिए।
सोशल मीडिया और न्यूज आउटलेट्स के जरिए की गई इन टिप्पणियों ने ईरान को बातचीत में शामिल रखने की कोशिशों को मुश्किल बना दिया। इस बातचीत का मकसद तेहरान के परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान की अरबों डॉलर की संपत्ति को अनफ्रीज करने जैसे मुश्किल मुद्दों को सुलझाना था। हालांकि, किसी भी चीज से पहले ईरान लेबनान पर बातचीत करना चाहता था, जहां इजराइल की सेना ईरान समर्थित आतंकवादी समूह हिज्बुल्लाह से लड़ रही है, क्योंकि इस समझौते से सभी मोर्चों पर संघर्ष रुक जाता है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा, “ईरान को लेबनान में भारी-भरकम रकम पाने वाले अपने प्रॉक्सी को गड़बड़ी फैलाने से तुरंत रोकना चाहिए। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो हम ईरान पर फिर से बहुत जोरदार हमला करेंगे, ठीक वैसे ही जैसे हमने पिछले हफ्ते किया था, बल्कि उससे भी ज्यादा जोरदार!!!” ट्रंप की इन टिप्पणियों के बाद ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने एक्स पर कहा, “उन्हें अपने बयानों को लेकर सावधान रहना चाहिए।”
“हमारी सेनाएं उन्हें अलग तरह से जवाब देने के लिए तैयार हैं। वे चाहे जितनी बातें करते रहें, असल में कार्रवाई तो हम ही करते हैं।” ईरानी सरकारी मीडिया ने कहा कि बातचीत एक “मुश्किल दौर” में पहुंच गई थी और “अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा अपमानजनक संदेश जारी किए जाने” के बाद इसे रोक दिया गया। सरकारी मीडिया के अनुसार, इसके बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने कतरी मध्यस्थों से मुलाकात की और बातचीत वाली जगह से चले गए। वेंस और स्टीव विटकोफ और जेरेड कुशनर (ट्रंप के दामाद) समेत अमेरिकी वार्ताकारों ने कालीबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की थी। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक ये मुलाकात लगभग 80 मिनट तक चली, बातचीत करने वालों ने होर्मुज को खुला रखने और दक्षिणी लेबनान में युद्ध विराम लागू करने के लिए “प्रक्रिया” पर भी चर्चा की, साथ ही परमाणु मुद्दे पर भी “ठोस” चर्चा की।
वार्ताकार, तकनीकी पहलुओं को लेकर एक समझौते पर पहुंचने के लिए 60 दिनों की दौड़ में हैं, जिसका दुनिया की अर्थव्यवस्था और वैश्विक सुरक्षा पर बहुत बड़ा असर पड़ेगा। बातचीत शुरू होते ही वेंस ने कहा, “अब हमारे सामने सवाल ये है कि हम मिलकर और कितना कुछ हासिल कर सकते हैं? क्या हम एक नया रास्ता खोल सकते हैं?” और पूछा कि क्या वे “मध्य पूर्व में रिश्तों को हमेशा के लिए बदल सकते हैं”।
अमेरिका चाहता था कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत में शामिल रहे, क्योंकि ऐसी चिंता थी कि इसका इस्तेमाल सैन्य मकसद के लिए किया जा सकता है। हालांकि ईरान ने इससे इनकार किया। वेंस ये भी चाहते थे कि तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने का वादा करे, जिसे ईरान ने शनिवार को बंद करने का दावा किया था। अमेरिका ने इस दावे को गलत बताया और कहा कि रविवार को भी जहाजों की आवाजाही जारी रही। लेकिन ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी समाचार एजेंसी को बताया कि तेहरान चाहता है कि बातचीत सबसे पहले लेबनान में चल रहे संघर्ष पर केंद्रित हो। शनिवार को लेबनान में हुए नए संघर्ष-विराम के कायम रहने के आसार दिखे और इजराइली सेना ने कहा कि वो सोमवार सुबह लेबनान सीमा के पास रहने वाले लोगों पर लगी आवाजाही की पाबंदियां हटा लेगी – जो शांति का एक और संकेत है।
लेकिन न तो इजराइल और न ही हिज्बुल्लाह अमेरिका-ईरान समझौते में शामिल थे और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कसम खाई थी कि जब तक इजराइल को कोई खतरा बना रहेगा, तब तक वे अपनी सेना को दक्षिणी लेबनान में तैनात रखेंगे। हिज्बुल्लाह ने तब तक हमले रोकने से इनकार कर दिया था जब तक इजराइल सेना हटाने का वादा न करे। ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के बीच हुए समझौते से तेहरान को तुरंत अपना तेल आजादी से बेचने की इजाज़त मिल गई और ईरान के लिए अरबों डॉलर की उन संपत्तियों का इस्तेमाल करने का रास्ता भी खुल गया जो अभी फ्रीज (रोकी हुई) हैं।
ईरान की बातचीत करने वाली टीम के एक सदस्य ने सरकारी टीवी को बताया कि “तेल और पेट्रोलियम से बनी चीजों पर कुछ समय के लिए प्रतिबंधों में ढील” देने के बारे में समझौते का मसौदा तैयार हो गया है। समझौते में ये भी कहा गया है कि ईरान को अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम करना होगा। माना जाता है कि ये भंडार उन परमाणु ठिकानों के नीचे दबा हुआ है जिन्हें एक साल पहले अमेरिका के हमलों में निशाना बनाया गया था।
ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, पेजेश्कियान ने रविवार को कहा कि “हम यूरेनियम को संवर्धित करने के अपने अधिकार से कभी पीछे नहीं हटेंगे और दूसरे पक्ष को भी इसे मानना ही होगा।” बाद में, फॉक्स न्यूज के साथ टेलीफोन पर बातचीत में ट्रंप ने चेतावनी दी कि ईरानी राष्ट्रपति को सोच-समझकर बोलना चाहिए। साथ ही, फॉक्स के एक रिपोर्टर के जरिए दी गई जानकारी के मुताबिक, उन्होंने ईरान पर कब्जा करने की धमकी भी दी। परमाणु मुद्दे पर अमेरिका के साथ बातचीत के अपने पिछले अनुभवों को देखते हुए ईरान ने इन वार्ताओं में सावधानी बरती थी, क्योंकि पिछले साल दो बार सैन्य हमलों की वजह से बातचीत में रुकावट आई थी।