दुनिया के इन देशों में राष्ट्रपति के शपथ लेने की ये हैं अनोखी परंपराएं

दुनिया के अलग अलग देशों में नए राष्ट्रपति के शपथ लेने की अनोखी परंपराएं है। कहीं भाले-ढाल के साथ, कहीं अनानास वाली शर्ट में राष्ट्रपति शपथ लेते है। तो कहीं शपथ लेने के बाद राष्ट्रपति को सोने की मोटी चेन मिलती है। ऐसे ही भारत की बात करें तो भारत में भी 25 जुलाई को ही राष्ट्रपति के शपथ लेने की परंपरा बनी है। ये सिलसिला 1977 से चला आ रहा है। हालांकि इससे पहले राष्ट्रपति के शपथ लेने की कोई तारीख तय नहीं थी। ऐसी कई परंपराएं दुनिया के अलग-अलग देशों में भी हैं। तो आइए जानते है इन देशों में राष्ट्रपति पद की शपथ से जुड़ी कुछ रोचक परंपराओं के बारे में……

तंजानिया———
तंजानिया में राष्ट्रपति बहुत शक्तिशाली होता है। यहाँ राष्ट्रपति ही हेड ऑफ स्टेट और हेड ऑफ गवर्नमेंट भी होता है। हर 5 साल में जनता आमचुनावों के जरिए राष्ट्रपति को चुनती है। यहां शपथ लेने के बाद राष्ट्रपति को देश के संविधान के साथ भाला और ढाल दिया जाता है। इसके साथ ही 21 तोपों की सलामी भी दी जाती है। 9 दिसंबर 1961 को ब्रिटेन से आजादी मिलने के बाद से ही यह परंपरा चली आ रही है। बता दें कि भाला और ढाल मसाई जनजाति का प्रमुख हथियार होता है, जिसे लीडरशिप और आर्म्ड फोर्स का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा यहां कोई भी शख्स अधिकतम सिर्फ दो बार ही राष्ट्रपति बन सकता है।

इंडोनेशिया —————
इंडोनेशिया में प्रेसिडेंशियल सिस्टम है। यहां सरकार की सारी पावर राष्ट्रपति के पास ही होती है। हर 5 साल में राष्ट्रपति को सीधे जनता ही चुनती है। यहां राष्ट्रपति के धार्मिक पुस्तक की छाया में शपथ लेने की परंपरा है। शपथ के दौरान राष्ट्रपति के पीछे एक धार्मिक व्यक्ति हाथों में धार्मिक पुस्तक लेकर खड़ा रहता है और उसे राष्ट्रपति के सिर से कुछ ऊंचाई पर उठाता है तब राष्ट्रपति शपथ लेता है। बता दें कि वर्तमान राष्ट्रपति जोको विडोडो मुस्लिम है तो उन्होंने 2021 में राष्ट्रपति पद की शपथ कुरान के तले ली थी। इंडोनेशिया में भी कोई व्यक्ति सिर्फ दो बार ही राष्ट्रपति बन सकता है।

फिलीपींस———
फिलीपींस में भी राष्ट्रपति हेड ऑफ स्टेट और हेड ऑफ गवर्नमेंट होता है। यहां भी राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता करती है। हालांकि यहां के राष्ट्रपति का कार्यकाल 6 साल का होता है। खास बात यह है कि यहां के राष्ट्रपति शपथ ग्रहण के दौरान अनानास के पत्तों से बनी एक खास ट्रेडिशनल शर्ट पहनकर शपथ लेते हैं। यह फिलीपींस की नेशनल ड्रेस है, जिसे बैरोंग तैगालोग कहते हैं। बता दें कि 1953 में रेमन मैग्सेसे ने सबसे पहले ये शर्ट पहनकर राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। वहीं 1948 तक राष्ट्रपति बाइबिल लेकर शपथ ग्रहण नहीं करते थे। 1953 में रेमन मैग्सेसे ने इस परंपरा को तोड़ा और दो बाइबिलों के साथ शपथ ली थी।

रूस————————
रूस में सेमी-प्रेसिडेंशियल सिस्टम लागू है, लेकिन सरकार की ज्यादातर शक्तियां राष्ट्रपति के पास होती हैं। राष्ट्रपति को सीधे देश की जनता चुनती है। यहां राष्ट्रपति को कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट का चेयरमैन पद और गोपनीयता की शपथ दिलाता है। शपथ लेते समय राष्ट्रपति अपना दायां हाथ संविधान पर रखते हुए शपथ लेता है। साथ ही शपथ के समय राष्ट्रपति को एक सोने की चेन भी दी जाती है। इस सोने की चेन के कॉस में 9 रूसी राजकीय चिन्ह और गच्छे होते हैं। बता दें कि यहां 2008 से राष्ट्रपति का कार्यकाल 6 साल कर दिया गया, जो अधिकतम दो कार्यकाल के लिए चुना जा सकता है।

फ्रांस————————–
फ्रांस में भी सेमी प्रेसिडेंशियल सिस्टम है। यानी फ्रांस में सरकार की ज्यादातर शक्तियां राष्ट्रपति के पास होती हैं। राष्ट्रपति को सीधे जनता चुनती है। 22 साल पहले यानी 2000 तक यहां के राष्ट्रपति का कार्यकाल 7 साल का था। लेकिन अब इसे घटाकर 5 साल कर दिया गया है। खास बात ये है कि फ्रांस का राष्ट्रपति कोई ऑफिशियल शपथ नहीं लेता। बल्कि कॉन्स्टिट्यूशनल काउंसिल के चेयरमैन द्वारा घोषणा के बाद ही राष्ट्रपति का कार्यकाल शुरू हो जाता है। ग्रैंड चांसलर नए राष्ट्रपति को ग्रैंड कॉलर ऑफ द लेजन ऑफ ऑनर सौंपते हैं। बता दें कि ग्रैंड कॉलर फ्रांस का सर्वोच्च ऑर्डर ऑफ मेरिट है। ग्रैंड कॉलर 16 जंजीरों से बनी एक सोने की चेन होती है। इस परंपरा की शुरुआत नेपोलियन बोनापार्ट ने 1802 में की थी।

अमेरिका————–
अमेरिका में भी राष्ट्रपति ही हेड ऑफ गवर्नमेंट होता है। लेकिन अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता नहीं कर सकती है। दरअसल यहां अमेरिकी जनता सबसे पहले स्थानीय तौर पर एक इलेक्टर का चुनाव करती है। यह अमेरिकी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का प्रतिनिधि होता है। इलेक्टर ही राष्ट्रपति को चुनते हैं। इसके समूह को इलेक्टोरल कॉलेज कहा जाता है, जिसमें कुल 538 सदस्य होते हैं जो अलग-अलग राज्यों से आते हैं। राष्ट्रपति बनने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 270 से अधिक इलेक्टर्स के समर्थन की जरूरत होती है। अमेरिकी राष्ट्रपति का कार्यकाल 4 साल का होता है। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति हाथ में बाइबिल लेकर शपथ लेते हैं। इसे इनॉगरेशन डे कहा जाता है। ये एक परंपरा है, जिसे 1789 में अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन ने शुरू किया था।

भारत——————
द्रौपदी मुर्मू भारत की 15वीं राष्ट्रपति बन गई हैं। उन्हें 25 जुलाई को संसद के सेंट्रल हॉल में चीफ जस्टिस एनवी रमना ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। बता दें कि भारत में राष्ट्रपति हेड ऑफ स्टेट होता है, जबकि प्रधानमंत्री हेड ऑफ गवर्नमेंट होता है। लेकिन सत्ता की असली बागडोर प्रधानमंत्री के हाथों में होती है। भारत में राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं होता है। बल्कि जनता के चुने हुए प्रतिनिधि राष्ट्रपति को चुनते हैं। भारत के राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 साल होता है।
बता दें कि भारत का राष्ट्रपति 25 जुलाई को ही शपथ लेता है। संसद के सेंट्रल हॉल में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस शपथ दिलवाते हैं। चीफ जस्टिस की गैरमौजूदगी में सुप्रीम कोर्ट का सबसे सीनियर जज ये जिम्मेदारी निभाता है। शपथ ग्रहण के बाद राष्ट्रपति का संबोधन होता है। फिर वह राष्ट्रपति भवन जाते हैं। जहां नए राष्ट्रपति को 21 तोपों की सलामी दी जाती है।

रोचक बातें…………………………..
राष्ट्रपति को पद की शपथ के बाद 21 तोपों की सलामी दी जाती है।
भारत में 25 जुलाई को राष्ट्रपति के शपथ लेने की परंपरा है।
इसकी शरुआत 1977 में नीलम संजीव रेड्डी के शपथ से हुई थी।
9 राष्ट्रपति 25 जुलाई को शपथ ले चुके हैं।

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