Nepal PM: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ‘बालेन’ सोमवार को भारत और चीन के राजदूतों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। बालेन शाह के पद संभालने के 100 से ज्यादा दिनों के बाद यह उनकी इस तरह की पहली आमने-सामने की कूटनीतिक वार्ता होगी।
पहले भारतीय राजदूत और फिर चीनी समकक्ष से मिलने के बाद, शाह मंगलवार को अमेरिकी दूतावास के प्रभारी (चार्ज डी’ अफेयर्स) से भी मुलाकात करेंगे। अलग-अलग मुलाकातों की पुरानी परंपरा से हटते हुए शाह ने आठ अप्रैल को यहां प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सिंह दरबार’ में 17 राजदूतों और राजनयिक मिशनों के प्रमुखों के साथ एक संयुक्त शिष्टाचार मुलाकात की थी और उनमें भारत और चीन के प्रतिनिधि भी शामिल थे।
बालेन शाह ने 27 मार्च को जीत के बाद प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने रविवार को बताया कि शाह सोमवार सुबह भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव से और उसी दिन दोपहर बाद चीनी राजदूत झांग माओमिंग से मुलाकात करेंगे। इसके बाद, मंगलवार को प्रधानमंत्री की अमेरिकी दूतावास के प्रभारी स्कॉट अर्बोम और अन्य राजनयिकों के साथ बैठक होगी।
विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘द काठमांडू पोस्ट’ को बताया, ‘‘भारतीय राजदूत को पहले और उसके बाद चीनी राजदूत को आने के लिए कहा गया है। यानी दोनों राजदूत एक ही दिन प्रधानमंत्री से मिल रहे हैं, लेकिन पहले और बाद का समय सरकार की विदेश नीति की प्राथमिकता को भी दर्शाता है।’’
‘द पोस्ट’ ने प्रधानमंत्री बालेन के एक सलाहकार के हवाले से बताया कि विदेश मंत्रालय ने संबंधित दूतावासों को मुलाकात के लिए दिए गए समय की जानकारी दे दी है। खबर के अनुसार, बैठक का एजेंडा मुख्य रूप से परिचय-संबंधी होगा, जिसमें राजदूत शाह को द्विपक्षीय संबंधों की स्थिति के बारे में जानकारी देंगे और अपनी-अपनी सरकारों की ओर से कोई संदेश पहुंचाएंगे।
इससे पहले, प्रधानमंत्री ने आमने-सामने की मुलाकातों से परहेज किया था और यहां तक कि दक्षिण एवं मध्य एशियाई मामलों के लिए अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री स्टेट समीर पॉल कपूर और दक्षिण और मध्य एशिया के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत सर्जियो गोर से मिलने से भी इनकार कर दिया था। बालेन शाह ने एशियाई विकास बैंक के अध्यक्ष मासातो कांडा के साथ आमने-सामने की बैठक करके अपने ही बनाए नियम को तोड़ा था।कांडा छह जुलाई को तीन दिनों के लिए नेपाल के दौरे पर आए थे।
शाह ने न तो दक्षिणी और न ही उत्तरी पड़ोसी देश का दौरा किया। इसके बजाय, विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने जून में नई दिल्ली और बीजिंग के लगातार दौरे किए। खनाल ने पहले कहा था कि नेपाल भारत और चीन, दोनों के साथ मजबूत और गहरे संबंध बनाना चाहता है। उन्होंने दोनों पड़ोसियों को हिमालयी देश के लिए अहम साझेदार बताया। हाल ही में उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल खुद को जमीन से घिरे देश (लैंडलॉक देश) से बदलकर दो पड़ोसियों को जोड़ने वाले एक “जीवंत और गतिशील पुल” के रूप में विकसित करना चाहता है।