Jaishankar: विदेश मंत्री जयशंकर ने मंगोलियाई नेताओं से मुलाकात की, द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की

Jaishankar:  विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगोलियाई विदेश मंत्री बैटसेटसेग बटमुंख से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच विकास परियोजनाओं, क्षमता निर्माण, सुरक्षा एवं बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग की प्रगति की समीक्षा की। दो देशों की यात्रा के पहले चरण में उलानबातर पहुंचे जयशंकर ने मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना से मुलाकात की तथा उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की शुभकामनाएं प्रेषित कीं। जयशंकर ने मंगोलियाई विदेश मंत्री से मुलाकात को लेकर प्रसन्नता जताई।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘हमारी चर्चाओं में हमारे रणनीतिक साझेदारी की गर्मजोशी, मजबूती और संभावनाओं की झलक मिली। हमने विकास परियोजनाओं, क्षमता निर्माण, संस्कृति, शिक्षा, सुरक्षा और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग की प्रगति की समीक्षा की।’’ दोनों नेताओं ने खनन, स्वच्छ ऊर्जा और कृषि-प्रसंस्करण के क्षेत्रों में अवसरों पर भी चर्चा की। जयशंकर ने कहा, ‘‘एक तीसरे पड़ोसी और आध्यात्मिक साझेदार के रूप में भारत, मंगोलिया के साथ अपने घनिष्ठ और सौहार्दपूर्ण संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।’’

जयशंकर ने मुलाकात के बाद एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत-मंगोलिया संबंध “गहरी सभ्यतागत और आध्यात्मिक विरासत, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, मजबूत विकास आकांक्षाओं और लोगों के बीच मजबूत संबंधों” पर आधारित हैं। विदेश मंत्री ने बटमुंख के साथ अपनी बैठक को “बहुत गर्मजोशीपूर्ण और उपयोगी” बताते हुए कहा कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सहयोग के पूरे दायरे की समीक्षा की, जिसमें विकास साझेदारी, क्षमता निर्माण, प्रौद्योगिकी, आर्थिक और व्यापार सहयोग, आपूर्ति शृंखला सहयोग, शिक्षा, संस्कृति, रक्षा, सुरक्षा और ऊर्जा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने कहा, “हमने नये विचारों, नये अवसरों और अपनी रणनीतिक साझेदारी के अगले स्तर के लिए एजेंडा तैयार करने पर विचारों का आदान-प्रदान किया।”

उन्होंने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया, जिसमें बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग शामिल है। उन्होंने कहा, “हमने मंगोलिया पक्ष के साथ मिलकर अपनी रणनीतिक साझेदारी को और ऊंचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता दोहराई।” इससे पहले विदेश मंत्री जयशंकर ने मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना से भी मुलाकात की तथा उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित कीं। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति उखना की पिछले वर्ष की भारत यात्रा ने हमारी रणनीतिक साझेदारी को नयी गति प्रदान की थी। विभिन्न क्षेत्रों में हमारे मजबूत सहयोग को आगे बढ़ाने के संबंध में उनके मार्गदर्शन को मैं महत्व देता हूं। मैं उनसे पूरी तरह सहमत हूं कि सबसे बड़ी मित्रता आध्यात्मिक मित्रता होती है।”

जयशंकर ने मंगोलियाई संसद अध्यक्ष संदाग ब्याम्बत्सोत से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा, “आज संदाग ब्याम्बत्सोत से मिलकर खुशी हुई। भारत–मंगोलिया संसदीय आदान-प्रदान और मित्रता के उनके मजबूत समर्थन का स्वागत करता हूं। हमने जन-केंद्रित विकास साझेदारी को और गहरा करने के समर्थन को दोहराया।” विदेश मंत्री ने मंगोलियाई शिक्षा मंत्री एल. एन्ख-अमगालन और पूर्व राष्ट्रपति एन. एन्खबयार से भी मुलाकात की।

उन्होंने कहा, “आज दोपहर मंगोलिया शिक्षा मंत्री एल. एन्ख-अमगालन और पूर्व राष्ट्रपति एन. एन्खबयार के साथ अच्छी बातचीत हुई। हमारी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने में उनके सहयोग की हम सराहना करते हैं।” विदेश मंत्री ने मंगोलिया के सबसे बड़े बौद्ध उपासना स्थल गंदन मठ के मुख्य महंत खम्बा नोमुन खान गेशे लहारंपा डी जवजानदोर्जी से भी मुलाकात की। जयशंकर ने कहा, “हमारे सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत बनाने तथा दोनों देशों के लोगों के बीच सद्भावना बढ़ाने के लिए उनके आशीर्वाद हमारे लिए अत्यंत मूल्यवान हैं।”

इससे पहले मंगोलियाई स्टेट सेक्रेटरी मुंकटुशिंग इल्खानजाव ने जयशंकर के आगमन पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। जयशंकर ने कहा, ‘‘हम अपनी विशेष साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए उपयोगी बैठकों की उम्मीद करते हैं।’’ विदेश मंत्री जयशंकर मंगोलिया से बुधवार को कोरिया गणराज्य जाएंगे, जो उनकी दो दिवसीय यात्रा का अंतिम चरण होगा। सियोल में जयशंकर अपने दक्षिण कोरियाई समकक्ष चो ह्यून के साथ वार्ता करेंगे। साथ ही वे गुरुवार को ‘जेजू फोरम फॉर पीस एंड प्रॉस्पेरिटी’ में मुख्य भाषण भी देंगे। जेजू फोरम वैश्विक मुद्दों पर चर्चा का एक मंच है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के नेता और विशेषज्ञ भाग लेते हैं। जयशंकर की यह यात्रा भारत की एशियाई साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करने की प्रतिबद्धता दर्शाती है, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग और स्थिरता को बढ़ावा देना है।

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