NEET paper leak: सीबीआई के आरोपपत्र में नीट पेपर लीक के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के पैनल में शामिल पुणे के तीन विषय विशेषज्ञ पी. वी. कुलकर्णी (रसायन विज्ञान), मनीषा गुरुनाथ मांढरे (प्राणी विज्ञान एवं वनस्पति विज्ञान) और मनीषा संजय हवलदार (भौतिकी) को मुख्य आरोपी बताया गया है। एजेंसी ने हाल ही में अपनी अंतिम रिपोर्ट उस विशेष फास्ट-ट्रैक न्यायालय में सौंपी है जो “पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े आपराधिक मामलों” की सुनवाई कर रही है।
“जांच से पता चला है कि (इन तीनों) विशेषज्ञों को अनुवाद या बैक-ट्रांसलेशन (मूल भाषा में पुनः अनुवाद) के दौरान रफ काम करने के लिए गोपनीय परिसर में सादे कागज दिए गए थे।” आरोपपत्र में कहा गया है, “आरोपी पी. वी. कुलकर्णी (जो लीक का कथित मास्टरमाइंड है) ने इन कागजों का इस्तेमाल रसायन विज्ञान के सभी 135 सवालों और उनके जवाबों के विकल्प को छोटी पर्चियों पर संक्षेप में नोट करने और उन्हें चुपके से बाहर लाने के लिए किया।” इसमें कहा गया है कि एनटीए के गोपनीय परिसर में आने-जाने के दौरान विशेषज्ञों की कोई चेकिंग या तलाशी नहीं ली जाती थी। कुलकर्णी ने आसान सवालों को याद कर लिया और होटल लौटने के बाद उन्हें लिख लिया।
“एनटीए में वनस्पति विज्ञान के लिए अंग्रेजी से मराठी अनुवादक और प्राणी विज्ञान के लिए बैक ट्रांसलेशन (मूल भाषा में पुनः अनुवाद) का काम देख रहीं मनीषा गुरुनाथ मांढरे, दिन का काम खत्म करके होटल लौटने के बाद एनसीईआरटी की किताबों में जरूरी पैराग्राफ को मार्क करती थीं।” आरोपपत्र में कहा गया है, “उसी सामग्री के साथ दशकों के अनुभव की वजह से, वे आसानी से सवालों को एनसीईआरटी की किताबों की सामग्री से जोड़ पाती थीं।”
इसमें कहा गया है कि भौतिक विज्ञान के अनुवादक की जिम्मेदारी संभालने वाली मनीषा संजय हवलदार, “दिन का काम खत्म होने के बाद दिल्ली में अपने रहने की जगह पर लौटकर सवालों को संक्षेप में नोट कर लेती थीं।” अंतिम रिपोर्ट में कहा गया है कि इन विशेषज्ञों का काम किसी की नजर में नहीं आया, क्योंकि राजधानी के एनटीए कार्यालय में सीसीटीवी की लाइव फीड की निगरानी के लिए कोई विशेष नियंत्रण केंद्र नहीं था।
पेपर लीक की कड़ी को दिखाने वाले एक फ्लो चार्ट के अनुसार, परीक्षा से जुड़े सवाल इन विशेषज्ञों से “बिचौलियों के नेटवर्क” के एक समहू तक आसानी से पहुंच गए। इसमें बताया गया है कि सवाल तेजस हर्षदकुमार शाह, डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे, शिवराज मोटेगांवकर, धनंजय निवृत्ति लोखंडे और शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर तक पहुंचाए गए। इनमें से कुछ लोग कोचिंग संस्थान या कंसल्टेंसी चलाते थे।
फ्लो चार्ट के मुताबिक, इस चेन की अंतिम कड़ी में राजस्थान में शुभम मधुकर खैरनार, मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, विकास बिवाल और हरियाणा में यश यादव द्वारा उम्मीदवारों तक सवालों को “आगे पहुंचाना” शामिल था। उम्मीदवारों के साथ बातचीत और लेन-देन का जिक्र करते हुए, अंतिम रिपोर्ट में कहा गया है कि खैरनार ने पैसे के बदले उम्मीदवारों से संपर्क किया, उनसे शैक्षणिक दस्तावेज और गारंटी के तौर पर एक खाली चेक लिया और लीक हुए पेपर को आगे बांटने में शामिल लोगों के साथ लगातार संपर्क में रहा।
रिपोर्ट में कहा गया, “मंगीलाल बिवाल के मोबाइल फोन से मिली ऑडियो फाइलों से इस साजिश की योजना और इसमें शामिल लोगों की सोच का और पता चलता है।” “26 अप्रैल 2016 की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग में, उसने (मंगीलाल ने) चिंता जताई थी कि अगर विकास बिवाल और ऋषि बिवाल ने उम्मीदवारों के माता-पिता के साथ पैसे के लालच में कोई हरकत की, तो पेपर लीक का मामला सामने आ सकता है।”
आरोपपत्र में कहा गया, “दूसरी ऑडियो रिकॉर्डिंग में परीक्षा से चार दिन पहले यश यादव द्वारा पीडीएफ या हार्ड-कॉपी (प्रिंट आउट) के रूप में पेपर उपलब्ध कराने, कीमत को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 12 लाख रुपये करने, 150 सवालों के खास इंतजाम… और दूसरे खरीदारों के लिए 450 सवालों के एक आसान सेट के बारे में बातचीत का जिक्र है।” इसमें कहा गया है कि आरोपी मनीषा संजय वाघमारे “पैसे के बदले ‘नीट-यूजी 2026’ के सवाल लीक करने और उन्हें फैलाने वाले मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक है” और उसने “उम्मीदवारों और विषय विशेषज्ञों के बीच एक कड़ी के तौर पर काम किया”।
आरोपपत्र में कहा गया है, “इस व्यवस्था के जरिए, उसने उम्मीदवारों को विशेष क्लास के लिए सह-आरोपी कुलकर्णी और सह-आरोपी मनीषा मंधारे के पास भेजा। साथ ही छात्रों और उनके माता-पिता से पैसे इकट्ठा करके लीक हुआ पेपर हासिल किया। इसके अलावा, उसने परीक्षा से पहले सह-आरोपी धनंजय लोखंडे को लीक हुए सवाल बेचे।”
सीबीआई की अंतिम रिपोर्ट में ‘गवर्नमेंट एग्जामिनर ऑफ क्वेश्चन्ड डॉक्यूमेंट्स’ (जीईक्यूडी) – जो एक खास केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला है – की पुष्टि का भी जिक्र है। इसने पुष्टि की है कि जब्त किए गए कई सवालों के सेट पर मौजूद लिखावट, विषय विशेषज्ञों की लिखावट से मेल खाती थी। आरोपपत्र के मुताबिक, मनीषा हवलदार और तेजस शाह के डिजिटल डिवाइस से मिले भौतिक विज्ञान के 68 सवालों के जीईक्यूडी अध्ययन से पुष्टि हुई कि वे आरोपियों की लिखावट से मेल खाते हैं।
इसमें कहा गया है कि अलग-अलग उम्मीदवारों और बिचौलियों से जब्त किए गए रसायन विज्ञान के सवालों के सेट फोरेंसिक तौर पर कुलकर्णी के नोट्स से जुड़े थे और लीक हुई जीव विज्ञान सामग्री, विशेषज्ञ मनीषा मंधारे के दिए गए नोट्स की फोटोकॉपी पर आधारित था।