France: फ्रांस में बीते सप्ताह विरोध-प्रदर्शनों के दौरान तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी की घटनाओं के बाद कई शहरों में लागू कर्फ्यू के बीच राजधानी पेरिस में शांति लौट आई। फ्रांस के विभिन्न शहरों में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के साथ झड़प की, कारों में आग लगा दी, सार्वजनिक इमारतों में तोड़फोड़ और दुकानों में लूटपाट की और एक ऐतिहासिक सिटी हॉल को आग के हवाले कर दिया।
बढ़ती महंगाई और स्कूलों की खराब हालत के खिलाफ हुए राष्ट्रव्यापी विरोध-प्रदर्शनों के बाद कम से कम 2,400 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। पेरिस, लियोन, मार्सिले और अन्य शहरों में छोटे-छोटे समूहों ने सड़कों पर कचरे के डिब्बों, साइकिल और अन्य चीजों में आग लगा दी और दुकानों में लूटपाट की। पेरिस में सोमवार रात 11 बजे से मंगलवार सुबह छह बजे तक कर्फ्यू लागू रहा। सप्ताहांत की झड़पों का मुख्य केंद्र रहे ‘प्लेस डे ला रिपब्लिक’ के ऊपर रातभर पुलिस का एक हेलीकॉप्टर चक्कर लगाता रहा। हेलीकॉप्टर से ‘सर्चलाइट’ के जरिए ये जांचा जा रहा था कि कर्फ्यू के आदेश का पालन हो रहा है या नहीं।
मंगलवार सुबह कर्मचारियों ने क्रेन की मदद से चौराहे के बीचों-बीच स्थित प्रतिमा पर डाली गई विशाल चमकीले पीले रंग की जैकेट हटाई। ये जैकेट ईंधन की कीमतों को लेकर 2018 में शुरू हुए ‘येलो वेस्ट’ विरोध-प्रदर्शनों की याद दिलाती है, जिसने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के पहले कार्यकाल को हिलाकर रख दिया था। इसके बाद कर्मचारियों ने ‘प्रेशर वॉशर’ का इस्तेमाल करके स्मारक पर बनाए गए भित्ती चित्र को साफ किया।
प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने मंगलवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि “कर्फ्यू की वजह से कल रात हालात शांत रहे।” उन्होंने लिखा कि आज रात भी “जहां कहीं भी जरूरत होगी, वहां कर्फ्यू लगाया जाएगा और इसका फैसला स्थानीय स्तर पर मेयर और प्रीफेक्ट (हर क्षेत्र में राज्य के प्रतिनिधि) की ओर से मिलकर लिया जाएगा।” उत्तरी फ्रांस के लिले में न्याय मंत्री गेराल्ड डारमानिन ने कहा कि मंगलवार दोपहर तक पूरे देश में 149 लोगों को जेल भेजा जा चुका था। न्याय मंत्रालय के मुताबिक, शनिवार से अब तक गिरफ्तार किए गए लगभग 2,500 लोगों में से 800 से अधिक को अभियोजकों के सामने पेश किया गया है।
मंत्रालय ने बताया कि इनमें से ज्यादातर लोगों पर तुरंत मुकदमा शुरू कर दिया गया या उन्हें बाद की सुनवाई में पेश होने का आदेश दिया गया। अभियोजन कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, 17 अक्टूबर के विरोध-प्रदर्शनों के बाद अकेले पेरिस में लगभग 300 लोगों को अभियोजकों के सामने पेश किया गया। डारमानिन ने बताया कि उन्होंने अभियोजकों से कहा है कि अगर उन्हें कोई सजा बहुत हल्की लगती है, तो वे उसके खिलाफ अपील करें।
न्याय मंत्री ने कहा, “जिन लोगों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनका संपत्ति से जुड़े अपराधों के लिए जेल जाना बहुत ही दुर्लभ है, या यूं कहें कि ऐसा शायद ही कभी होता है।” उन्होंने कहा कि फ्रांस की न्याय प्रणाली इस मामले में “बेहद सख्त” रुख अपनाएगी। डारमानिन ने बताया कि लिले में 20 से 25 साल की उम्र के ऐसे तीन लोगों को एक वीडियो गेम स्टोर में लूटपाट करने के लिए 10-10 महीने की जेल की सजा सुनाई गई है, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
फ्रांसीसी संसद के निचले सदन ‘नेशनल असेंबली’ की अध्यक्ष याएल ब्रॉन-पिवेट ने कहा कि 17 अक्टूबर को हुई हिंसा और अधिकारियों की पुलिसिंग रणनीति की जांच शुरू की जा रही है, जिसके नतीजे “साल के अंत तक” आने की उम्मीद है।