America: ईरान की कमाई के सभी रास्ते बंद करना नए अमेरिकी प्रतिबंधों का मकसद- अमेरिका

America:  अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान पर नए प्रतिबंधों का ऐलान किया। उन्होंने ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों को चेतावनी दी कि वे उससे अपने आर्थिक और वित्तीय संबंध खत्म कर लें। ऐसा नहीं करने पर उन्हें अमेरिका की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। ईरान को दुनिया की अर्थव्यवस्था से और अलग करने की चेतावनी ऐसे समय दी गई है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले हफ्ते तेहरान के खिलाफ बड़ी आर्थिक कार्रवाई शुरू करने की बात कही थी। यह कदम करीब छह महीने से चल रहे संघर्ष के बाद उठाया गया है। इस बीच अमेरिकी प्रशासन इस संकट से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहा है।

बेसेंट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अमेरिका ने सभी देशों को अपनी उम्मीदों के बारे में साफ बता दिया है। उन्होंने कहा कि अगर किसी देश पर अमेरिकी ट्रेजरी की कार्रवाई होती है, तो इसके लिए वह खुद जिम्मेदार होगा। अमेरिका का कहना है कि नए प्रतिबंधों से ईरान की अर्थव्यवस्था पर और दबाव बढ़ेगा। ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से ही पुराने प्रतिबंधों और अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी के कारण प्रभावित है, अमेरिका की घोषणा में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई। यह भी साफ नहीं किया गया कि ईरान के साथ कारोबार करने वाले किन देशों पर सेकेंडरी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। चीन, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल हैं।

बेसेंट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप दुनिया के कई नेताओं से फोन पर बात कर ईरान के साथ बातचीत बंद करने की अपील कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप की इस कोशिश का असर भी दिखने लगा है। यूएई ने पिछले हफ्ते ईरान के साथ सभी तरह के व्यापार और कारोबारी लेन-देन रोकने का ऐलान किया। यह फैसला खाड़ी देश पर कथित मिसाइल हमले के बाद लिया गया। यह रोक अगले आदेश तक जारी रहेगी।

बेसेंट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप अपनी बात मनवाने में काफी माहिर हैं। उन्होंने कहा कि यूएई का ईरान के साथ कारोबार रोकने का फैसला कोई संयोग नहीं है। वहीं, इससे कुछ समय पहले ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़र गालिबाफ ने कहा था कि अमेरिका की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह ईरान के दूसरे देशों के साथ संबंधों पर और पाबंदियां लगा सके।

पिछले छह महीनों से ईरान की ओर से बातचीत कर रहे गालिबाफ ने एक्स पर कहा कि ईरान के व्यापारिक साझेदारों ने साफ कर दिया है कि वे अमेरिका के इन बयानों को गंभीरता से नहीं लेते। उन्होंने कहा कि साझेदारों ने यह बात मीडिया और ईरान को भेजे संदेशों के जरिए बताई है। बेसेंट की घोषणा से कुछ घंटे पहले ईरान की मुद्रा रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई।

करेंसी मार्केट खुलते ही ईरान की मुद्रा रियाल की कीमत गिरकर 20.2 लाख रियाल प्रति अमेरिकी डॉलर हो गई। ईरान के सेंट्रल बैंक की आधिकारिक दर करीब 15 लाख रियाल प्रति डॉलर थी। हालांकि, ज्यादातर लोग बाजार में चल रही दर पर ही लेन-देन करते हैं। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमले से पहले ही वहां की मुद्रा रियाल दबाव में थी। ईरान में महंगाई काफी ज्यादा थी और अर्थव्यवस्था की ग्रोथ भी गिर रही थी। करीब छह महीने से चल रहे युद्ध के दौरान रियाल की कीमत लगातार गिरती रही और यह बार-बार नए निचले स्तर पर पहुंची।

ईरान में लोगों के लिए रोजमर्रा की जरूरी चीजें खरीदना मुश्किल होता जा रहा है। युद्ध शुरू होने के बाद से चावल की कीमत करीब 60 फीसदी और बीफ की कीमत 150 फीसदी से ज्यादा बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का अनुमान है कि ईरान की अर्थव्यवस्था में पांच फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ सकती है।

इसके बावजूद ईरान पर बढ़ता आर्थिक दबाव अभी तक राजनीतिक दबाव में नहीं बदला है। ईरान के पास होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक रणनीतिक बढ़त है। वहां जहाजों पर हमलों और धमकियों के कारण इस अहम समुद्री रास्ते से आवाजाही लगभग रुक गई है। इससे दुनियाभर की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है और कांग्रेस चुनाव से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर दबाव भी बढ़ रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *