America: सीरिया की तरफ से बताया गया कि अबू दुहूर एयर बेस के रनवे पर इजराइल के आठ हवाई हमले हुए, जिनसे नुकसान तो हुआ लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ।
अमेरिकी राजदूत टॉम बैरक ने एक्स पर पोस्ट किया कि वाशिंगटन इस बात को लेकर बहुत चिंतित है कि इजराइल के हवाई हमलों की पुष्टि हुई है और ये हमले तनाव को बेवजह बढ़ाने वाले हैं, जिनसे इलाके में स्थिरता नहीं आएगी। इस हमले पर इजराइली सेना की ओर से कोई टिप्पणी नहीं आई और तुर्किये के अधिकारियों ने भी टिप्पणी के अनुरोधों का तुरंत कोई जवाब नहीं दिया।
युद्ध पर नजर रखने वाली ब्रिटेन की संस्था ‘सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स’ ने बताया कि हाल ही में वहां से जाने के लिए कहे जाने से पहले विदेशी लड़ाके इस बेस पर रहते थे। साथ ही, सीरियाई सरकार का मुख्य समर्थक देश तुर्किये, सीरियाई संघर्ष में लगभग पांच लाख लोगों की मौत के बाद इस बेस को फिर से ठीक कर रहा है।
ब्रिटिश सेना के ‘यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स सेंटर’ के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक जहाज पर एक प्रोजेक्टाइल (मिसाइल या रॉकेट जैसा हथियार) से हमला हुआ है। इसमें “क्रू के एक सदस्य की मौत” हुई है, लेकिन पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। इजराइल और अमेरिका की तरफ से ईरान के खिलाफ शुरू किए गए युद्ध को लगभग छह हो चुके हैं। ईरान की तरफ से जहाजों को दी गई धमकियों की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो गया है।
ईरान के एक अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि ये समुद्री रास्ता तब तक बंद रहेगा जब तक अमेरिका तेहरान की शर्तें नहीं मान लेता। इन शर्तों में ईरानी जहाजों पर अमेरिकी नाकेबंदी खत्म करना, “फ्रीज की गई संपत्ति को जारी करना, तेल पर लगे प्रतिबंध हटाना और सभी मोर्चों पर धमकियों और सैन्य अभियानों को रोकना” शामिल है।
तुर्किये ने ट्रंप से जंग का कूटनीतिक समाधान खोजने का आग्रह किया है। तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने ट्रंप से फोन पर बातचीत में ईरान के साथ चल रहे विवाद का कूटनीतिक समाधान खोजने की कोशिश जारी रखने का आग्रह किया। ये बातचीत सोमवार देर रात हुई, जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के लिए तय 60 दिन की बातचीत की अवधि खत्म हो रही थी। इसे बढ़ाने के बारे में कोई खबर नहीं थी और दोनों पक्ष शुरुआत की तरह ही एक-दूसरे से दूर नजर आ रहे थे।
तुर्किये के राष्ट्रपति कार्यालय के बयान के अनुसार, “राष्ट्रपति एर्दोगन ने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के माहौल में कूटनीति का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना जरूरी है।” ईरान शांति समझौते के लिए 60 दिन की समय-सीमा खत्म हो रही है। ट्रंप ने जून में वर्साय में जिस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, उसमें ईरान के साथ युद्ध खत्म करने और उसके परमाणु कार्यक्रम पर समझौता करने के लिए 60 दिन की महत्वाकांक्षी समय-सीमा तय की गई थी।
समय-सीमा सोमवार को खत्म हो रही थी और दोनों पक्ष उस समय की तुलना में अब और भी ज्यादा दूर हो गए हैं। जो भी बातचीत हुई है, वो होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरान पर अमेरिकी नाकेबंदी हटाने पर केंद्रित रही है; ये दोनों काम अंतरिम समझौते के तहत होने थे। जलडमरूमध्य के मुद्दे पर किसी समझौते या परमाणु कार्यक्रम पर विस्तृत बातचीत शुरू होने के भी कोई संकेत नहीं मिले हैं।
इस बीच, इजराइल के साथ मिलकर शुरू किए गए युद्ध से बाहर निकलने के लिए अमेरिका के पास कोई अच्छा विकल्प नहीं है। ईरान की हालिया मांगों को मानने का मतलब होगा उसे एक अहम अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग का नियंत्रण सौंपना, जिससे युद्ध से पहले दुनिया के व्यापार का पांचवां हिस्सा तेल और गैस के रूप में गुजरता था और ये हार मानने जैसा होगा। बेहद अलोकप्रिय युद्ध को और बढ़ाने से अमेरिका के एडवांस्ड मिसाइल इंटरसेप्टर का भंडार और कम हो जाएगा, वैश्विक अर्थव्यवस्था को झटका लगेगा और अमेरिकी कांग्रेस चुनावों से पहले गैस की कीमतें बढ़ जाएंगी।
इसलिए दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर अड़े हुए हैं, इस उम्मीद में कि दूसरा पक्ष पहले पीछे हटेगा। हालांकि, अब तक किसी ने भी ऐसा नहीं किया है।