Haryana: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि तिरंगा हमारे स्वतंत्रता सेनानियों का त्याग, वीर सैनिकों का शौर्य, माताओं की तपस्या, किसानों का परिश्रम और हमारे युवाओं के सपनों की चमक है। यहां कुरुक्षेत्र की हवाएं एक ही संदेश दे रही हैं कि राष्ट्र से बड़ा कुछ नहीं, तिरंगे से बढकऱ कोई गौरव नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर हर घर तिरंगा एक जन-अभियान व राष्ट्र उत्सव बन चुका है। वर्ष 2022 में शुरू हुए इस अभियान ने राष्ट्रीय ध्वज के साथ प्रत्येक नागरिक के संबंध को अधिक आत्मीय बनाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सोमवार को लाडवा व थानेसर विधानसभा में आयोजित राज्य स्तरीय तिरंगा यात्रा में बोल रहे थे। इससे पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्यस्तरीय तिरंगा यात्रा का पिपली मंडल से शुभारंभ किया।
इस तिरंगा यात्रा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ साथ सांसद नवीन जिंदल, हरियाणा के पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा सहित हजारों नागरिकों व कार्यकर्ताओं ने तिरंगा यात्रा में भाग लिया और यह तिरंगा यात्रा पुलिस लाईन, नए बस स्टैंड, द्रोणाचार्य स्टेडियम से होती हुई थानेसर मंडल के लघु सचिवालय में बने शहीदी स्मारक पर सम्पन्न हुई। इस तिरंगा यात्रा में हजारों लोगों ने तिरंगा हाथ में लेकर पूरे जोश के साथ भारत माता के जयघोष बोलकर धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की फिजा में देश भक्ति का रंग घोल दिया है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शहीदी स्मारक पर पुष्प चक्र अर्पित कर शहीदों को नमन किया और शहीदों के परिजनों को शाल ओढाकर सम्मानित किया। इसके उपरांत मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, सांसद नवीन जिंदल, पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा ने शहीदी स्मारक पर कदम का पौधा लगाया।मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आम जन के हाथों में तिरंगा देखकर मेरा मन श्रद्धा और राष्ट्रभक्ति से भर गया है। कुरुक्षेत्र कोई साधारण भूमि नहीं है। यह वह धर्मभूमि है, जहां भगवान श्रीकृष्ण ने मानव मात्र को श्रीमद्भागवत गीता का अमर संदेश दिया था कि कर्तव्य से कभी पीछे मत हटो। इसी धरती से हम तिरंगा यात्रा निकाल रहे हैं। यह अद्भुत संयोग हमें याद दिलाता है कि राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य का पालन करना ही आधुनिक युग का राष्ट्रधर्म है।
उन्होंने कहा कि गीता हमें कर्मयोग सिखाती है और तिरंगा हमें राष्ट्रयोग सिखाता है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि एक समय था जब तिरंगा केवल सरकारी भवनों पर दिखाई देता था। आज यह हर गली, हर गांव, हर छत, हर दुकान और हर भारतवासी के हृदय में लहरा रहा है। जब किसी गरीब की छोटी-सी झोपड़ी पर तिरंगा लहराता है तो वह झोपड़ी भी भारत के स्वाभिमान का मंदिर बन जाती है और जब किसी किसान के ट्रैक्टर पर तिरंगा सजता है तो मिट्टी का प्रत्येक कण राष्ट्रभक्ति की सुगंध से भर जाता है। जब कोई बच्चा अपने हाथ में तिरंगा लेकर चलता है तो उसमें हमें विकसित भारत का भविष्य दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि इस तिरंगा यात्रा से हमें सामाजिक एकता का भी संदेश देना है। हमारी भाषा अलग हो सकती है, वेशभूषा अलग हो सकती है, पूजा-पद्धति अलग हो सकती है, लेकिन हमारा तिरंगा एक है। तिरंगा हम 140 करोड़ भारतीयों की पहचान है, धडकऩ है। जब तिरंगा लहराता है, तब छोटे-बड़े, गरीब-अमीर और शहर-गांव के सभी भेद मिट जाते हैं। केवल एक पहचान बचती है कि हम सब भारतीय हैं।उन्होंने कहा कि तिरंगा यात्रा आगे बढऩेे के साथ हमारेे कदमों के साथ हमारा संकल्प भी आगे बढऩा चाहिए। हर हाथ में तिरंगा हो, हर मन में भारत हो और हर कर्म में राष्ट्रहित हो। तिरंगा हमारे घर की छत पर भी लहराए और हमारे चरित्र में भी दिखाई दे।