सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि संबंधित वीडियो को प्लेटफॉर्म द्वारा हटाया जाना चाहिए था। उनका कहना था कि वीडियो की सामग्री समाज में विभाजन पैदा करने वाली और नुकसान पहुंचाने वाली हो सकती है। गूगल की ओर से अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता पहले ही सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत ग्रिवांस अपीलेट कमेटी (GAC) में अपील दायर कर चुकी हैं।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने GAC को निर्देश दिया कि वह लंबित अपील पर 15 दिनों के भीतर निर्णय ले। इसके साथ ही अदालत ने याचिका का निस्तारण कर दिया। याचिका में कहा गया था कि अमिता सचदेवा ने पहले यूट्यूब के रेजिडेंट ग्रिवांस ऑफिसर के पास शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद उन्होंने GAC में अपील की, लेकिन आईटी नियम 2021 के नियम 3A(4) में तय समय सीमा के बावजूद कोई फैसला नहीं लिया गया। याचिका में यह भी बताया गया कि इसी मामले से जुड़ी एक आपराधिक शिकायत साकेत कोर्ट में भी लंबित है, जहां वीडियो को लेकर एफआईआर दर्ज करने की मांग पर अदालत ने पहले संबंधित थाना प्रभारी (SHO) से एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) मांगी थी।