Uttarakhand: अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने एक मामले पर कड़ा संज्ञान लिया है, जिसमें उत्तराखंड के एक “शरारती व्यक्ति” ने कथित तौर पर सिखों को जून 1984 की घटना दोहराने की धमकी दी थी। एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार “उन्होंने उत्तराखंड सरकार से कार्रवाई करने को कहा और कहा कि ऐसे लोग देश की शांति, सद्भाव और सांप्रदायिक भाईचारे के लिए गंभीर खतरा हैं।
उन्होंने कहा कि उस व्यक्ति को यह नहीं भूलना चाहिए कि वह खुलेआम सिख समुदाय को चुनौती दे रहा है, जिसके बलिदान और शहादत ने देश को आज़ादी दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी बातों के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह बयान साफ दिखाता है कि देश में कुछ उपद्रवी तत्वों के मन में सिखों के प्रति नफरत कितनी गहरी है।”
उन्होंने सिखों से कहा कि वे ऐसे लोगों से सावधान रहें और यात्रा के दौरान किसी भी तरह से उकसावे में न आएं। जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने उत्तराखंड सरकार से कहा कि वह ऐसे उपद्रवी तत्वों पर काबू रखे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में कुछ शरारती तत्वों द्वारा सिखों के ‘ककार’ (धार्मिक प्रतीक) धारण करने के अधिकार पर सवाल उठाने की बार-बार की जा रही कोशिशों को रोका जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर सिख और पंजाबी उत्तराखंड की यात्रा करते हैं, तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी है। यह बहुत गंभीर मामला है कि कुछ स्थानीय लोगों ने पहले तीर्थयात्रा पर आए सिखों को उनके धार्मिक प्रतीकों और पहनावे के कारण निशाना बनाया और बाद में इस मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देकर दोनों समुदायों के बीच तनाव पैदा कर दिया।
इसमें कहा गया, “उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार को ऐसे उपद्रवी तत्वों की पहचान करनी चाहिए और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।” इसमें आगे कहा गया, “अगर ऐसा व्यवहार नहीं रोका गया, तो सिखों को उत्तराखंड की यात्रा के बारे में कोई कड़ा फैसला लेने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।”
इसमें यह भी कहा गया कि जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) को निर्देश दिया कि वह अमृतसर में उसके खिलाफ उसकी धमकी और सिख-विरोधी टिप्पणियों को लेकर सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू करे, ताकि ऐसे लोगों को सबक सिखाया जा सके।