Ankita Bhandari: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकित भंडारी हत्याकांड मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने CBI जांच की संस्तुति दे दी है। वहीं ही इस मामले में स्वामी दर्शन भारती और पर्यावरण विद अनिल जोशी की भूमिका को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं जिस पर विपक्ष भी कहीं सवाल खड़े कर रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने कहा कि जिस तरह की गतिविधि चल रही है इसमें सत्ता का खेल दिखाई दे रहा है।
इस मामले में शुरू से ही सरकार संदेह के घेरे में रही है चाहे एफआईआर में विलंब हो सबूत को मिटाना हो लेकिन अब जब जनता का दबाव पड़ा तो अब सीबीआई जांच की संस्तुति की है और उसमें भी निष्पक्षता तभी होगी जब सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच होगी। उन्होंने कहा कि सीबीआई अंकित के माता-पिता या उसके भाई की फिर पर होनी चाहिए थी क्योंकि अफेक्टेड पार्टी वही है अब अर्जी को आधार बता रहे हैं जबकि अर्जी और कंप्लेंट में फर्क होता है.
लेकिन सरकार उनको वो मौका ही नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि दो लोग इसमें पता नहीं कहां से प्रकट हो गए यह किसी को समझ नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा कि एक बात स्पष्ट है कि इसको उत्तराखंड स्वीकार नहीं करेगा उसको लेकर हम लड़ाई लड़ते रहेंगे।
हरीश रावत ने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि अंकित ने अपनी हत्या किए जाने के चंद घंटे पहले अपने दोस्त से वीडियो मैसेज में यह कहा कि रिज़ॉर्ट में VIP आने वाले हैं और मुझ पर दबाव डाला जा रहा है कि मैं उन्हें विशेष सर्विस दूँ और मैंने इनकार कर दिया है। यहाँ सब कुछ ठीक नहीं है। चंद घंटों बाद ही अंकिता की हत्या हो जाती है। अंकिता के हत्या की रिपोर्ट लिखे जाने में आनाकानी होती है। उसके शव को निकालने में बहुत विलंब होता है। मोबाइल आदि, जो महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते थे, उन्हें बरामद नहीं किया जाता है। फिर रिज़ॉर्ट में CCTV कैमरे तोड़े जाते हैं, JCB मशीन से कुछ कक्षों को भी तोड़ा जाता है तथा अंत में रिजोर्ट में आग भी लगा दी जाती है। साक्ष्य नष्ट करने की इस प्रक्रिया से यह स्पष्ट हो जाता है कि ये VIP है और कोई अति महत्वपूर्ण व्यक्ति है जिसको जांच के दायरे से बचाने के लिए उपरोक्त सब कदम उठाए गये हैं। केस में VIP है, यह अंकिता के बयान से सिद्ध हो जाता है। उसका बयान एक महत्वपूर्ण साक्ष्य है। हत्या के कुछ कारण या मोटिव होता है। इस प्रकरण में VIP को विशेष सेवा देने से इंकार करना हत्या का कारण बना है और इसी कारण स्वरूप रिजोर्ट स्वामी के लिए अंकिता को हमेशा के लिए चुप कराना भी आवश्यक हो गया। सारा कारण या उद्देश्य, इस VIP शब्द के चारों तरफ खड़ा है।
इसके साथ ही कहा कि निश्चय ही न्याय के ऑप्शन हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट हैं, जहां बारीकी से निचले न्यायालय के निर्णय की विवेचना होती है। वहॉ अंकिता के हत्यारों को दंड मिले इसके लिए VIP पर FIR आवश्यक है। इस केस में VIP अपने आप में एक महत्वपूर्ण आईडेंटिटी है। अंकिता के हत्यारों को अंतिम रूप से दंड मिले उस हेतु भी VIP और रिजोर्ट आदि स्थानों पर साक्ष्य मिटाने वालों के विरुद्ध FIR दर्ज होना अति आवश्यक है अन्यथा हम “अंकिता हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं” का नारा लगाते रह जाएंगे और कातिल बाहर खुले में हम सबका मजाक उड़ाएंगे। इस वीआईपी को कानून के शिकंजे में आना इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि उत्तराखंड में दूर-दूर रिजोर्ट और होमस्टे बन गए हैं उनके संचालन के लिए कोई स्पष्ट मार्ग निर्देशिका नहीं है। धानड्य बनने की होड़ में कुछ लोग इन स्थलों का दुरुपयोग कर सकते हैं जैसा वनंतरा रिजॉर्ट में हुआ।
लोगों को यह मालूम हो कि उत्तराखंड में आप प्रकृति, संस्कृति और उत्तराखंडी व्यंजनों का आनंद लेने जा सकते हैं। लेकिन यदि आप नारी सानिध्य के उद्देश्य से उत्तराखंड आ रहे हैं तो आपकी खैर नहीं। हमारी संस्कृति, हमारी आध्यात्मिकता, हमारी धरती की पवित्रता की रक्षा के लिए भी आवश्यक है कि वनंतरा रिजोर्ट से जुड़े इस प्रकरण में VIP को कानून समुचित दंड मिले इस हेतु हमें चौकन्ना और यत्नशील रहना है। तथ्यात्मक जाँच के लिए आवश्यक है कि एफआईआर के लिए तहरीर दी जानी चाहिए, न किसी अन्य व्यक्ति द्वारा पहले अंकिता के आत्मजों द्वारा दी गई तहरीर जिसमें VIP व साक्ष्य नष्ट करने वालों की जांच और उन पर मुकदमा चलाये जाने का उल्लेख होना चाहिए।