Diwali: दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के बाजारों में रौनक बढ़ गई है। इस बार बाजारों में मिट्टी से तैयार पारंपरिक उत्पाद लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। अलग-अलग आकार, रंग और डिजाइन में उपलब्ध हस्तनिर्मित सामान की खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में लोग बाजार पहुंच रहे हैं।
बाजार में सजावटी लाइटों और आधुनिक डेकोरेशन के कई विकल्प मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद पारंपरिक मिट्टी के दीयों की मांग बरकरार है। लोग घरों और पूजा स्थलों को रोशन करने के लिए मिट्टी के दीयों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
दीयों के अलावा मिट्टी से बने घड़े, थालियां, पूजा की मूर्तियां और सजावट से जुड़ी कई अन्य वस्तुएं भी दुकानों पर उपलब्ध हैं। खास बात यह है कि आधुनिक और डिजाइनर उत्पादों के बीच भी पारंपरिक हस्तनिर्मित सामान अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं।
त्योहार के दौरान बढ़ती मांग से मिट्टी के उत्पाद बनाने वाले कारीगरों और दुकानदारों को कारोबार में अच्छी उम्मीद नजर आ रही है। हालांकि, कारीगरों के सामने कच्चे माल की उपलब्धता एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है।
मिट्टी के बर्तन और दीये बनाने वाले कारीगरों का कहना है कि आसपास के क्षेत्रों में अब आसानी से मिट्टी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। ऐसे में उन्हें दूसरे स्थानों से मिट्टी मंगवानी पड़ रही है, जिससे उत्पादन की लागत और मेहनत दोनों बढ़ जाती हैं।
कारीगरों को उम्मीद है कि सरकार उनकी समस्याओं पर ध्यान देगी और उन्हें पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल उपलब्ध कराने के लिए जरूरी कदम उठाएगी। इससे न केवल उनका पारंपरिक कारोबार मजबूत होगा, बल्कि दिवाली जैसे त्योहारों पर मिट्टी के हस्तनिर्मित उत्पादों की मांग भी पूरी की जा सकेगी।