Ayodhya: अयोध्या में दीपोत्सव-2026 को यादगार बनाने के लिए तैयारियां अब अपने अंतिम पड़ाव पर हैं। सात नवंबर को आयोजित होने वाले इस भव्य समारोह में सरयू नदी के तट पर 2,147 अर्चक एक साथ सामूहिक महाआरती करेंगे। लक्ष्मण किला घाट से नया घाट और राम की पैड़ी तक होने वाला यह धार्मिक आयोजन शाम करीब 5:20 बजे से 5:50 बजे तक चलेगा।
दीपोत्सव के दसवें संस्करण को खास बनाने के लिए सरयू नदी के 56 घाटों को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है। घाटों पर होने वाली रोशनी, दीपों की सजावट और सामूहिक महाआरती से पूरी रामनगरी भक्तिमय वातावरण में सराबोर नजर आएगी।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में वर्ष 2017 में महज 1.71 लाख दीये जलाकर शुरू हुआ दीपोत्सव आज एक भव्य सांस्कृतिक आयोजन का रूप ले चुका है। जनभागीदारी और धार्मिक परंपराओं के मेल से यह उत्सव हर साल नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष अयोध्या में 26 लाख से अधिक दीप प्रज्ज्वलित किए गए थे। इस बार सात नवंबर को करीब 30 लाख दीयों से रामनगरी को रोशन करने की तैयारी है। कार्यक्रम में सामूहिक सरयू आरती के अलावा अंतरराष्ट्रीय रामलीला और 2,100 ड्रोन के जरिए आसमान में रामायण के प्रमुख प्रसंगों का प्रदर्शन भी आकर्षण का केंद्र रहेगा।
तीन वर्षों में लगभग दोगुनी हुई अर्चकों की संख्या
मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, दीपोत्सव के दौरान सरयू तट पर आयोजित होने वाली सामूहिक महाआरती समारोह का प्रमुख आकर्षण रहेगी। वैदिक मंत्रों के उच्चारण और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के बीच हजारों दीपों से सजे घाट श्रद्धालुओं को अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव देंगे।
उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में महाआरती में शामिल होने वाले अर्चकों की संख्या लगातार बढ़ी है। वर्ष 2024 में 1,121 अर्चकों ने इस अनुष्ठान में हिस्सा लिया था, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 2,128 हो गई। इस वर्ष 2,147 अर्चक एक साथ मां सरयू की आरती करेंगे।
गौरतलब है कि वर्ष 2025 के नौवें दीपोत्सव में 2,128 अर्चकों और वेदाचार्यों ने सामूहिक सरयू महाआरती कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया था। इस बार भी आयोजन को भव्य स्वरूप देने के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं।
वैश्विक पहचान बना रहा अयोध्या का दीपोत्सव
पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कहा कि दीपोत्सव अब अयोध्या की धार्मिक आस्था, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक सहभागिता का प्रमुख प्रतीक बन गया है।
उन्होंने कहा कि हर साल इस आयोजन का दायरा बढ़ रहा है और इसके जरिए उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल रही है। इस बार भी पारंपरिक दीप सज्जा, सामूहिक सरयू आरती और आधुनिक तकनीक के अनूठे संगम से समारोह को विशेष बनाया जाएगा।
अपर मुख्य सचिव के मुताबिक, सरकार का प्रयास है कि अयोध्या पहुंचने वाले श्रद्धालु यहां की धार्मिक परंपराओं, आध्यात्मिक वातावरण और सांस्कृतिक भव्यता का यादगार अनुभव लेकर लौटें। 30 लाख दीयों की रोशनी और हजारों अर्चकों की सामूहिक आरती के साथ इस बार का दीपोत्सव रामनगरी के लिए एक और ऐतिहासिक अवसर बनने जा रहा है।