KGBV: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) में शिक्षा और सुविधाओं का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है, सरकार का उद्देश्य बेटियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल, सुरक्षित आवास और आगे बढ़ने के समान अवसर देना है, ताकि आर्थिक या सामाजिक परिस्थितियां उनकी पढ़ाई में रुकावट न बनें। वर्ष 2017 के मुकाबले 2026 तक इन विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और छात्राओं के लिए उपलब्ध अवसरों में कई बदलाव हुए हैं।
कक्षा 6 से 12 तक मुफ्त शिक्षा की सुविधा
पहले कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में केवल कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाई की व्यवस्था थी, लेकिन अब छात्राओं को कक्षा 6 से 12 तक निःशुल्क शिक्षा दी जा रही है। इससे उन बालिकाओं को आगे पढ़ने का अवसर मिला है, जिन्हें आठवीं कक्षा के बाद आर्थिक या अन्य कारणों से पढ़ाई छोड़नी पड़ सकती थी, विद्यालयों में छात्राओं की संख्या भी बढ़ी है। वर्ष 2017 में जहां 72,680 छात्राएं नामांकित थीं, वहीं 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 88,248 हो गया है। छात्राओं की कुल भागीदारी 50 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई है। इसे बालिका शिक्षा के प्रति बढ़ते रुझान और अभिभावकों के भरोसे से जोड़कर देखा जा रहा है।
DBT के जरिए छात्रवृत्ति भुगतान में पारदर्शिता
छात्राओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए छात्रवृत्ति भुगतान प्रणाली में भी बदलाव किया गया है। वर्ष 2017 में यह व्यवस्था प्रभावी रूप से संचालित नहीं थी, जबकि अब प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से पात्र छात्राओं के खातों में राशि भेजी जा रही है। इससे सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने और भुगतान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिली है।
स्मार्ट क्लास और एस्ट्रोनॉमिकल लैब से जुड़ रहीं छात्राएं
सरकार इन विद्यालयों को बेहतर शिक्षण संस्थानों के साथ-साथ छात्राओं के समग्र विकास के केंद्र के रूप में तैयार कर रही है। इसके लिए विद्यालय भवनों को उन्नत बनाने, सुरक्षित आवासीय परिसर और हॉस्टल की सुविधाएं विकसित करने पर ध्यान दिया जा रहा है। छात्राओं को रहने के लिए सुरक्षित माहौल, पौष्टिक भोजन और आवश्यक देखभाल उपलब्ध कराने का प्रयास है। शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए ICT लैब और स्मार्ट क्लास की सुविधा दी जा रही है। वहीं, एस्ट्रोनॉमिकल लैब के माध्यम से छात्राओं में खगोल विज्ञान, वैज्ञानिक सोच और नवाचार के प्रति रुचि विकसित करने पर जोर है।
खेल, चिकित्सा और रक्षा क्षेत्र में भी बढ़ रहे कदम
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की छात्राएं अब पढ़ाई के साथ विभिन्न क्षेत्रों में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं। खेलों में छात्राओं का चयन क्रिकेट टीमों में हुआ है और वे राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता दिखा रही हैं।
चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में कुछ छात्राओं ने NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर डॉक्टर बनने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। रक्षा सेवाओं में भी छात्राओं ने उपलब्धियां दर्ज कराई हैं। इसके अलावा UPSC, UPPCS, लेखपाल, शिक्षक भर्ती और अन्य विभागीय परीक्षाओं में छात्राओं का चयन हुआ है। डिजिटल शिक्षा, कंप्यूटर प्रशिक्षण, कोडिंग और अन्य तकनीकी कौशलों के जरिए उन्हें आधुनिक रोजगार के अवसरों के लिए तैयार किया जा रहा है।
नेतृत्व क्षमता और सामाजिक सहभागिता पर भी जोर
सरकार का प्रयास छात्राओं को अकादमिक शिक्षा तक सीमित रखने के बजाय उनमें नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है। इसके लिए वाद-विवाद प्रतियोगिताओं, विभिन्न मंचों, NCC और स्काउट-गाइड जैसी गतिविधियों में उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
शिक्षा, खेल, विज्ञान, तकनीक और सामाजिक गतिविधियों में छात्राओं की बढ़ती भागीदारी उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर दे रही है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश की प्रत्येक बेटी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और वह अपने सपनों को पूरा करने के लिए सक्षम बन सके। स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी ने बताया कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्राओं को कक्षा 6 से 12 तक मुफ्त शिक्षा के साथ सुरक्षित आवासीय माहौल और आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं दी जा रही हैं। स्मार्ट क्लास, ICT और एस्ट्रोनॉमिकल लैब के अलावा छात्रवृत्ति, खेल और प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से उन्हें आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं। हमारा उद्देश्य है कि हर बेटी अच्छी शिक्षा प्राप्त कर आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य हासिल करे।