Parvesh Verma: दिल्ली उच्च न्यायालय ने उस याचिका पर दिल्ली पुलिस और पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा से जवाब मांगा जिसमें वर्मा द्वारा आम आदमी पार्टी (एएपी) के एक कार्यकर्ता को कथित तौर पर थप्पड़ मारने की घटना की स्वतंत्र जांच कराने का अनुरोध किया गया है। न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने याचिका पर पुलिस और वर्मा को नोटिस जारी किया और पुलिस को स्थिति रिपोर्ट दायर करने को कहा।
अदालत ने वर्मा को भी याचिका पर अपना जवाब देने को कहा। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 नवंबर की तारीख तय की। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री वर्मा ने 27 सितंबर को तिलक नगर में सड़क के निरीक्षण के दौरान कथित तौर पर एक व्यक्ति को थप्पड़ जड़ दिया था। मंत्री ने साहिब सिंह नामक व्यक्ति को कथित रूप से थप्पड़ मारा था जिसका दावा है कि वह तिलक नगर से एएपी विधायक जरनैल सिंह का सहयोगी है।
उसने दावा किया कि वह एएपी विधायक के सोशल मीडिया खातों का प्रबंधन करता है। याचिकाकर्ता ने अपनी जान और स्वतंत्र रूप से जीवन जीने की सुरक्षा, सीसीटीवी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा मारपीट, धमकी और पुलिस की निष्क्रियता के अपने आरोपों की स्वतंत्र जांच का अनुरोध किया है।
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसने 29 सितंबर को पुलिस आयुक्त को एक विस्तृत शिकायत सौंपी थी, जिसमें उसने घटना का ब्योरा देते हुए निष्पक्ष जांच, कानूनी कार्रवाई और अपने तथा अपने परिवार की सुरक्षा का अनुरोध किया था। याचिका में कहा गया, ‘‘याचिकाकर्ता और उनके परिवार को लगातार मिल रही धमकियों, पुलिसकर्मियों के आचरण और स्थानीय पुलिस द्वारा जांच की निष्पक्षता को लेकर आशंकाओं को देखते हुए याचिकाकर्ता ने अपनी जान और स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए इस अदालत का रुख किया…।’’
याचिका में कहा गया कि घटना के दिन याचिकाकर्ता अपने मोबाइल फोन पर पूरी कार्यवाही की रिकॉर्डिंग कर रहा था तभी वर्मा सड़क निर्माण की गुणवत्ता और भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े सवालों पर भड़क गए। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उसे थप्पड़ मारा गया, अपशब्द कहे गए और धमकी दी गई और जिस फोन से वह वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहा था उसे जबरदस्ती छीनकर क्षतिग्रस्त कर दिया गया। उसने कहा कि घटना की रिकॉर्डिंग की गई थी और इसे सोशल मीडिया मंचों पर प्रसारित किया गया। उसने उसी दिन विकासपुरी के थाना प्रभारी (एसएचओ) से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई थी।
याचिकाकर्ता ने पुलिसकर्मियों के आचरण पर सवाल करते हुए दावा किया कि जब वर्मा की सुरक्षा टीम के एक सदस्य ने उन्हें धक्का दिया और मंत्री को घटनास्थल से निकलने में मदद की तो वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों ने कोई दखल नहीं दिया। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उसके मोबाइल फोन और सोशल मीडिया खातों पर विभिन्न नंबरों और खातों से लगातार धमकी भरे तथा अपमानजनक संदेश और फोन आ रहे हैं।