Saharanpur: नवरात्रि की शुरुआत से बहुत पहले ही उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कारीगरों के हाथों इस त्योहार के शुरुआती रंग आकार लेने लगते हैं। यहां पारंपरिक सांझी मूर्तियां बनाने के लिए अप्रैल से ही मिट्टी को तैयार करने और आकार देने का काम शुरू हो जाता है।
जैसे-जैसे त्योहार का समय करीब आता है, मिट्टी से बनी इन आकृतियों को बड़े ध्यान से रंगा और सजाया जाता है। धीरे-धीरे ये रंग-बिरंगी मूर्तियों का रूप ले लेती हैं, जो घरों और मंदिरों में अपनी जगह बनाने के लिए तैयार होती हैं।
कारीगरों के लिए हर सांझी के पीछे महीनों की मेहनत होती है। प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी सांझियों से मिल रही चुनौतियों के बावजूद, हाथ से बनी मिट्टी की सांझियों के खरीदार अब भी हैं। त्योहारी मौसम में इनकी मांग बढ़ने लगती है।
इन कारीगरों के लिए ये त्योहार सिर्फ पूजा-पाठ का समय नहीं, बल्कि बरसों पुरानी इस कला को जिंदा रखने का भी मौका है। नवरात्रि जैसे-जैसे करीब आ रही है, उन्हें उम्मीद है कि अच्छी बिक्री से उनकी रोजी-रोटी चलती रहेगी और पीढ़ियों से चली आ रही ये परंपरा भी आगे बढ़ती रहेगी।