Russia: रूस में युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार हुए संसदीय चुनाव के शुरुआती नतीजे सामने आ गए हैं। सोमवार तड़के जारी किए गए नतीजों के मुताबिक, क्रेमलिन के समर्थन वाली मुख्य पार्टी ने चुनाव में बढ़त बनाए रखी है। कड़े नियंत्रण में हुए इस चुनाव में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नीतियों का बहुत कम विरोध देखने को मिला। शुरुआती तस्वीर से संकेत मिल रहे हैं कि इस चुनाव के बाद क्रेमलिन की पकड़ और मजबूत हो सकती है।
रूस के केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने सोमवार तड़के चुनाव के शुरुआती नतीजे जारी किए। आयोग के अनुसार, करीब 58 प्रतिशत मतदान केंद्रों पर मतगणना पूरी हो चुकी है और अब तक के रुझानों में पार्टी की सूची के आधार पर चुने जाने वाले 225 सांसदों की सीट पर ‘यूनाइटेड रशिया’ को लगभग 58 प्रतिशत वोट मिले हैं।
इसके अलावा, 225 सांसदों का चुनाव अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में सीधे मुकाबले के जरिए होना है। इन सीट में से भी अधिकांश पर यूनाइटेड रशिया के उम्मीदवार आगे हैं। इस चुनाव में पहली बार यूक्रेन के उन चार क्षेत्रों के निवासियों को भी शामिल किया गया है, जिन्हें युद्ध शुरू होने के बाद मॉस्को ने अवैध रूप से रूस में मिला लिया था, हालांकि इन क्षेत्रों पर रूस का अब भी पूरी तरह नियंत्रण नहीं है। कीव ने इस कदम को गैर-कानूनी बताया था और यूरोपीय संघ ने इसे “अंतर्राष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन” कहा था।
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समर्थन वाली ‘यूनाइटेड रशिया’ पार्टी की चुनावी जीत क्रेमलिन को सत्ता पर अपनी मज़बूत पकड़ बनाए रखने में मदद करेगी। इस चुनाव में अधिकांश विपक्षी नेताओं को उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरने की अनुमति नहीं दी गई। मतदान ऐसे समय हुआ, जब रूस में सोवियत दौर के बाद से राजनीतिक दमन की स्थिति है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सबसे कड़ी पाबंदियां लागू हैं।
शुरुआती नतीजों के मुताबिक, चार अन्य पार्टियां भी संसद के निचले सदन ‘स्टेट ड्यूमा’ में अपनी जगह बनाए रखने में सफल रही हैं। रूस के स्टेट सेक्रेटरी और उप विदेश मंत्री येवगेनी इवानोव ने सेंट्रल इलेक्शन कमीशन में कहा कि विदेशों में रूसी स्टेट ड्यूमा चुनाव की वोटिंग में बाधा डालने की कोशिशें नाकाम रही हैं।