Nepal Floods: नेपाल के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में बचाव कार्य जारी है, बचाव दल मुश्किल रास्तों और खराब संचार नेटवर्क से जूझते हुए उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं जो अचानक आई बाढ़ की वजह से बाकी दुनिया से कट गए हैं।
फंसे हुए लोगों को निकालने और बचाव दलों और जरूरी राहत सामग्री को उन इलाकों तक पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं, जहां सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल है। इस आपदा में फंसे लोगों में कई ऐसे पर्यटक भी शामिल हैं जो लगभग एक हफ्ते से फंसे हुए हैं। संचार नेटवर्क खराब होने की वजह से कई लोगों का बाहरी दुनिया से संपर्क टूट गया है।
इस तबाही की वजह से प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों के पास सुरक्षित जगहों पर जाने के अलावा और कोई चारा नहीं बचा है। हालांकि इस निराशा के बीच उम्मीद की एक किरण भी दिखाई दे रही है, क्योंकि बड़े पैमाने पर चल रहे खोज और बचाव अभियानों के जरिए छोटे बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित बचाया जा रहा है।
बचाए गए लोगों में ढाई महीने का एक बच्चा भी शामिल था, जिसे उसकी मां के साथ रसुवा के एक राहत शिविर में लाया गया। अचानक आई भयानक बाढ़ से मरने वालों की संख्या 900 के पार पहुंच गई है, जबकि लगभग 4,000 लोग अब भी लापता हैं। अब तक 10,000 से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका है, जबकि लोगों की तलाशने में जुटी टीमें रुक-रुक कर हो रही बारिश, उफनती नदियों और टूटी सड़कों व पुलों के बीच फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने या हिमस्खलन से आई इस अचानक बाढ़ ने 26 अगस्त को उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई।