Twisha Sharma: भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में 12 मई की रात मृत पाई गईं तविशा शर्मा की मौत के मामले में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने अपनी अंतिम फोरेंसिक राय में इसे आत्महत्या का मामला बताया है। बोर्ड ने कहा कि तविशा के शरीर पर शारीरिक हमले या संघर्ष के संकेत देने वाली कोई चिकित्सकीय-कानूनी रूप से महत्वपूर्ण चोट नहीं मिली।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने 10 जुलाई को 11 पन्नों की मेडिकल राय सीबीआई को सीलबंद लिफाफे में सौंपी थी। बोर्ड का गठन मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 22 मई के आदेश के बाद किया गया था। हाईकोर्ट ने रिट याचिका संख्या 19119/2026 में AIIMS, नई दिल्ली में दोबारा पोस्टमार्टम कराने का निर्देश दिया था। मेडिकल बोर्ड ने 24 मई को शव का पोस्टमार्टम किया और फोरेंसिक जांच के तहत घटनास्थल का भी निरीक्षण किया।
AIIMS के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता ने बताया कि मेडिकल बोर्ड ने मामले के सभी पहलुओं की बारीकी से जांच करने के बाद निष्कर्ष निकाला है। उन्होंने कहा कि बोर्ड की राय के मुताबिक यह आत्महत्या का मामला है और मृतका के शरीर पर शारीरिक हमले के कोई संकेत नहीं मिले हैं। डॉ. गुप्ता ने यह भी बताया कि बोर्ड ने कथित फांसी में इस्तेमाल किए गए लिगेचर को लेकर उठे विवाद का भी समाधान किया है। जांच के दौरान जिम्नास्टिक बेल्ट और उसमें लगे धातु के छल्ले को लेकर सवाल उठे थे।
डॉ. गुप्ता के अनुसार, मेडिकल बोर्ड ने करीब एक महीने तक मामले के सभी पहलुओं पर बेहद बारीकी से विचार किया और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल्स में उपलब्ध शोध को भी ध्यान में रखा। उन्होंने कहा कि बोर्ड ने वैज्ञानिक आधार और विस्तृत विश्लेषण के साथ अपनी राय दी है, जिससे सीबीआई और न्यायपालिका को मामले की सच्चाई और न्याय के लिए स्पष्ट चिकित्सा निष्कर्ष मिल सके।
तविशा शर्मा 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में मृत पाई गई थीं। उनके ससुराल पक्ष ने जहां इसे आत्महत्या बताया था, वहीं उनके मायके वालों ने हत्या का आरोप लगाया था। इससे पहले सोमवार को ही सीबीआई ने तविशा शर्मा मौत मामले में 636 पन्नों की चार्जशीट सीबीआई कोर्ट में दाखिल की। इसमें उनके पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को आरोपी बनाया गया है। दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और दहेज निषेध अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।