Nag Panchami: नाग पंचमी और सावन सोमवार का खास संयोग बन रहा है, सावन का सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है, वहीं नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा की जाती है। दोनों पर्व एक ही दिन होने के कारण इस दिन शिव पूजा और नाग देवता की आराधना का महत्व और बढ़ गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने और सावन सोमवार को भगवान शिव का जलाभिषेक करने से सुख-शांति, परिवार की सुरक्षा और समृद्धि की कामना की जाती है। श्रद्धालु इस दिन व्रत, पूजा, मंत्र जाप और दान-पुण्य कर सकते हैं।
सावन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। वहीं नाग पंचमी का संबंध भी भगवान शिव से माना जाता है, क्योंकि उनके गले में नाग विराजमान हैं। ऐसे में इस दिन शिव पूजा के साथ नाग देवता का स्मरण और पूजन करना भक्तों के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है।
नाग पंचमी श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है और इस दिन नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग देवता का भगवान शिव से विशेष संबंध है। इसलिए इस दिन शिव पूजा के साथ नाग देवता का स्मरण करना भी शुभ माना जाता है। कई स्थानों पर नाग पंचमी के दिन नाग देवता को दूध अर्पित करने की परंपरा है। हालांकि, जीवित सांपों को दूध पिलाने से बचना चाहिए। इसके बजाय नाग देवता की प्रतिमा या तस्वीर की पूजा करना बेहतर है।
पूजा का शुभ मुहूर्त-
पंचांग के अनुसार, आज यानि 17 अगस्त को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:24 बजे से 05:08 बजे तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:51 बजे तक रहेगा। इन शुभ समय में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करना शुभ माना जाता है।