Monsoon: देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी का सामना कर रहे लोग बेसब्री से मानसून की बारिश का इंतजार कर रहे हैं। वहीं मौसम वैज्ञानिक एक ऐसी मौसमी घटना पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं, जिसका आने वाले महीनों में देश के मौसम पर असर पड़ सकता है। ज्यादातर लोगों ने ‘अल नीनो’ के बारे में सुना होगा। ये एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें मध्य और भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान बढ़ जाता है।
हालांकि, मौसम वैज्ञानिक बताते हैं कि अल नीनो की मौजूदगी का मतलब अपने आप कमजोर मानसून नहीं होता है। भारत का मानसून कई तरह के मौसम तंत्रों से प्रभावित होता है और ‘इंडियन ओशन डाइपोल’ जैसे अनुकूल कारक अल नीनो के असर को कम करने में मदद कर सकते हैं।
‘इंडियन ओशन डाइपोल’ एक ऐसी मौसमी घटना है जो पश्चिमी और पूर्वी हिंद महासागर की सतह के तापमान में अंतर को बताती है। सकारात्मक ‘इंडियन ओशन डाइपोल’ अक्सर भारत के कुछ हिस्सों में बारिश बढ़ाता है।
हालांकि, इस बार बन रहा अल नीनो भारत के किसानों के लिए चिंता का विषय है। मौसम विभाग के अनुसार, देश में चार जून से 18 जून के बीच बारिश में 41 प्रतिशत की कमी देखी गई है। मध्य भारत में बारिश में 67 प्रतिशत की कमी देखी गई है, जबकि पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 42 फीसदी कम बारिश हुई है, जिससे कई इलाकों में बुवाई और अच्छी फसल को लेकर चिंता बढ़ गई है।
मौसम विभाग का कहना है कि वो किसानों को जानकारी देता रहता है ताकि वो आगे की योजना बना सकें और कम बारिश के असर को कम करने के लिए उपाय कर सकें। दक्षिण-पश्चिम मानसून के उत्तर की ओर धीमी गति से बढ़ने और भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल-नीनो की स्थिति के बनने से भारत में बारिश कम होती है। इससे खरीफ की फसलों पर बुरा असर पड़ सकता है, क्योंकि इन फसलों को अच्छी तरह बढ़ने के लिए समय पर बारिश की जरूरत होती है।
अगले दो महीनों में मानसून की स्थिति खेती, जल संसाधनों और समय पर होने वाली बारिश पर निर्भर लाखों लोगों की आजीविका के लिए बहुत अहम है।