Gujarat: अलग-अलग डिजाइन और आकार वाली ये रंग-बिरंगी राखियां जल्द ही देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे सैनिकों की कलाई की शोभा बढ़ाएंगी। 12 सालों से, वडोदरा के एक पूर्व शिक्षक लोगों को सैनिकों के लिए राखियां भेजने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। उनकी इस मुहिम उनके ही कई पूर्व छात्र भी शामिल हैं। ये सब मिलकर राखियां भारत की सीमाओं पर तैनात सैनिकों तक पहुंचाते हैं।
ये पहल 2015 में मात्र 75 राखियों से शुरू हुई थी, अब बढ़कर 68,000 राखियों, 4,000 पत्रों और शुभकामना संदेशों तक पहुंच गई है। एक व्यक्ति की पहल के रूप में शुरू हुआ यह प्रयास अब लगभग 500 लोगों की भागीदारी वाला एक संगठित प्रयास बन गया है।
कुछ लोगों के लिए, इस पहल का गहरा भावनात्मक महत्व है क्योंकि रक्षा बंधन के बाद भी संबंध बने रहते हैं। सैनिक राखी भेजने वाले परिवारों और व्यक्तियों के साथ संपर्क में रहते हैं। राखी सिर्फ स्थानीय लोग ही नहीं भेजते हैं। देश भर के भारतीय, साथ ही अमेरिका, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में रहने वाले भारतीय भी रक्षा बंधन पर सैनिकों को उपहार भेजते हैं।
इस साल रक्षाबंधन पर कई सैनिक अजनबियों द्वारा भेजी गई राखियों से अपनी कलाई सजाएंगे, जो उन्हें याद दिलाएंगी कि भले ही वे अपने प्रियजनों से दूर हों, लेकिन उन्हें देश के वे लोग भी बहुत प्यार करते हैं जिनसे वे कभी मिले तक नहीं हैं।