हल्द्वानी के प्रकाश चंद्र उपाध्याय ने बनाया विश्व का सबसे छोटा गिटार, लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज

नमिता बिष्ट

उत्तराखंड के एक आर्टिस्ट ने कला जगत में नया विश्व स्तरीय कीर्तिमान बनाकर उत्तराखंड के नाम एक और उपलब्धि दर्ज कराई है। जी हां हम बात कर रहे है हल्द्वानी के हल्दूचौड़ निवासी प्रकाश उपाध्याय की । जिन्होंने दुनिया का सबसे छोटा गिटार बनाने का कारनामा कर दिखाया है। उनके इस गिटार को लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज किया गया है। बता दें कि प्रकाश इससे पहले विश्व का सबसे छोटा हस्तनिर्मित चरखा बनाकर दो बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं।

लिम्का बुक में दर्ज दुनिया का सबसे छोटा गिटार
हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में आर्टिस्ट के तौर पर काम करने वाले प्रकाश उपाध्याय ने दुनिया का सबसे छोटा गिटार तैयार किया है। उपाध्याय द्वारा बनाया गया यह छोटा गिटार एक वर्किंग मॉडल है, जिसे लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में जगह मिली है। यह गिटार महज 3 सेंटीमीटर का है, लेकिन हैरत की बात यह है कि इसे बजाया जा सकता है और इसकी धुन को सुना भी जा सकता है।

सिर्फ 4 घंटे 30 मिनट में बनाया गिटार
प्रकाश चंद्र उपाध्याय ने 3 सेंटीमीटर लम्बाई वाले इस गिटार को शुद्ध चन्दन की लकड़ी, तांबे और एल्युमीनियम के तार और पिन की मदद से तैयार किया है। इस कलाकृतिक की खास बात यह है कि इस छोटे से गिटार से धुन निकल सकती है, जिसे माइक्रोफोन और स्पीकर की मदद से सुना जा सकता है। उपाध्याय ने यह गिटार अप्रैल 2020 में बनाया था, जिसे साल 2021-22 की लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में जगह दी गई है। बता दें कि उपाध्याय को यह कारनाम करने में सिर्फ 4 घंटे 30 मिनट का वक्त लगा है।

सबसे छोटा चरखा बनाने का भी वर्ल्ड रिकॉर्ड
प्रकाश चंद्र उपाध्याय के नाम कई उपलब्धियां दर्ज हैं। इससे पहले प्रकाश विश्व का सबसे छोटा हस्तनिर्मित चरखा भी बना चुके हैं। जिसकी साइज 5×6×4 मिलीमीटर थी। जिसे लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में 2017 दर्ज किया गया था। इसके बाद इन्होंने अपना ही रिकार्ड और छोटा चरखा बनाकर तोड़ दिया। जिसकी साइज 4.50 ×3.50× 3.50 मिलीमीटर है, जिसे लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड 2019 में दर्ज किया गया।

ये कारनामें भी गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड
प्रकाश उपाध्याय के कारनामों की लिस्ट बड़ी लंबी है। 2013 में उपाध्याय ने इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड मंव सबसे छोटी हस्तलिखित किताब बनाने का भी रिकॉर्ड दर्ज कराया था। इस किताब का साइज 3 × 4 × 4 मिमी था। इससे पहले उनके नाम सबसे छोटी हनुमान चालीसा और सबसे छोटी पेंसिल बनाने का भी रिकॉर्ड दर्ज हो चुका है। यही नहीं 2018 में विश्व का सबसे छोटा शिप बनाने का कारनामा उनके नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है। यह जहाज सिर्फ 1.20 सेंटीमीटर लंबा और 0.50 सेंटीमीटर चौड़ा है, जिसे उन्होंने कांच के बोतल के भीतर स्थापित किया था।

प्रकाश को मिल चुके हैं ये पुरस्कार
प्रकाश उपाध्याय को गोल्ड अवार्ड, एक्सीलेंस अवार्ड 2020, एक्सीलेंस अवार्ड 2021, उत्तराखंड आइकन अवार्ड 2021 , मात्रृका पुरस्कार, नटराज कला रत्न सम्मान, कलाअनन्त सम्मान, कोरोना वॉरियर सम्मान,उत्कृष्टता सम्मान, सहित अनेकों राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा कई स्वर्ण पदक, कांस्य पदक,प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिन्ह भी दिया गया हैं। इसके अलावा प्रकाश के नाम 6 व्यक्तिगत विश्व रिकॉर्ड और तीन सामूहिक गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज हैं। उनके काम को संयुक्त राष्ट्र अमेरिका की प्रतिष्ठित किताब गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड (2019) में भी दर्ज कर लिया गया है।

पेंटिग्स में नजर आती है उत्तराखंड की पीड़ा
प्रकाश उपाध्याय ने कोरोना काल में 80 से अधिक राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय ऑनलाइन चित्रकला प्रतियोगिता, प्रदर्शनी और कार्यशालाओं में देश के विभिन्न प्रदेशों में प्रतिभाग किया। जिसके लिए विभिन्न संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत किया जा चुका है। प्रकाश चन्द्र अपनी पेंटिंग्स में उत्तराखण्ड की महिलाओं के संघर्ष, पलायन और सामाजिक सरोकारों को चित्रित कर चुके हैं।

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