Joshimath Sinking: भवन ढहाए जाने की कार्रवाई शुरू, सबसे पहले तोड़े जाएंगे ये दो होटल

उत्तराखंड के जोशीमठ में दरारों का खौफ लगातार बढ़ रहा है। अब तक 678 इमारतों में दरारें पड़ी हैं। वहीं, 82 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। इसके साथ ही असुरक्षित भवनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अब तक कुल 678 भवन चिह्नित किए जा चुके हैं। सीबीआरआई की टीम ने सोमवार को मलारी इन और माउंट व्यू होटल का सर्वे किया था। आज इन दोनों होटलों से भवनों को ढहाने की शुरुआत होगी। इन होटलों को अत्यधिक क्षति पहुंची है। आज रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट भी जोशीमठ का दौरे है। भवनों को गिराने के लिए विस्फोटकों की मदद नहीं ली जाएगी। सीबीआरआई के वैज्ञानिकों की देखरेख में लोनिवि की टीम मेकेनिकल तकनीक से भवनों को गिराएगी। इसके लिए मजदूरों की मदद ली जाएगी।

सबसे पहले तोड़े जाएंगे दो होटल

सबसे पहले होटल मलारी इन और मांउट व्यू को तोड़ा जाएगा। केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की के विशेषज्ञों की टीम के निर्देशन और एनडीआरएफ, एसडीआरएफ की मौजूदगी में होटल को तोड़ने की कार्रवाई होगी। पहले होटल मलारी इन तोड़ा जाएगा। इसके लिए 60 मजदूरों के साथ ही दो जेसीबी, एक बड़ी क्रेन और दो टिप्पर ट्रक लगाए गए हैं।

जोशीमठ मामले की आज SC में होगी सुनवाई

उधर, जोशीमठ मामले पर कुछ देर बाद सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई कि मांग को लेकर याचिका मुख्य न्यायधीश के सामने रखी जाएगी। उत्तराखंड के जोशीमठ में जमीन धंसने का मामला शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के वकील आज सुप्रीम कोर्ट में रखेंगे। सोमवार को चीफ जस्टिस ने वकील से कहा था कि वो आज मामले को मेंशन करें उसके बाद सुनवाई पर निर्णय लिया जाएगा। कोर्ट तैयार होती है या नहीं और अगर होती है तो कब सुनवाई करेगी वह तस्वीर साफ होगी।

बता दें कि जोशीमठ भूधंसाव मामले को लेकर एक याचिकाकर्ता ने तत्काल सुनवाई की अपील की है। साथ ही जोशीमठ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने का अनुरोध भी किया है। याची ने अपील में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट तत्काल मामले में हस्ताक्षेप करे। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने अपील को तत्काल सुनवाई के लिए लिस्ट  करने को लेकर मंगलवार को इसका उल्लेख करने को कहा है। प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सिम्हा की पीठ ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से पेश हुए अधिवक्ता परमेश्वर नाथ मिश्रा से यह कहा गया है। जोशीमठ में भूधंसाव से उत्पन्न संकट को राष्ट्रीय संकट घोषित करने का अनुरोध करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने याचिका दाखिल की है।

जोशीमठ के तुरंत मिले मुआवजा

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने तर्क दिया है कि बड़े पैमाने पर औद्योगीकरण के कारण जोशीमठ में यह संकट आया है। उन्होंने उत्तराखंड के लोगों को तत्काल वित्तीय सहायता और मुआवजा दिए जाने की मांग भी की है। याचिका में मांग की गई है कि इस चुनौतीपूर्ण समय में जोशीमठ के निवासियों को पूर्ण समर्थन देने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को निर्देश दिया जाए।

 

 

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