उत्तराखंड चुनाव: तराई में जीत-हार तय करते हैं किसान, BJP गिना रही काम, कांग्रेस-AAP याद दिला रही आंदोलन का बलिदान

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रुद्रपुर. उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव (Uttarkhand Chunav) नजदीक आते ही सभी राजनीतिक पार्टियां अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए रैलियों के साथ ही हर वर्ग को रिझाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही हैं. किसान आंदोलन ख़त्म होने के बाद अब बीजेपी-कांग्रेस और आम आदमी पार्टी किसान वोट बैंक को अपने पक्ष में करने में जुट गई हैं.

तराई की 9 में से 7 विधानसभा सीटों में किसानों का बड़ा वोट बैंक है. कृषि कानूनों के खिलाफ एक साल तक चले आंदोलन में तराई के किसान बेहद सक्रिय रहे थे और बीजेपी से खुले तौर पर नाराज भी थे. हालांकि अब आंदोलन खत्म होने के बाद बीजेपी किसानों को अपने पक्ष में करने की कोशिशों में जुटी है. बीजेपी किसान मोर्चा 16 दिसंबर से इन सभी विधानसभा क्षेत्रों में किसान सम्मेलन शुरू करने जा रही है. इसके लिए कार्यकर्ता गांवों में चौपाल लगाने के साथ ही घर-घर जाकर किसानों से संपर्क कर रहे हैं. इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की किसान हित में चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दे रहे हैं.

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वहीं कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी किसानों को अपने पक्ष में लाने में पूरी ताकत लगा रही हैं. दोनों ही पार्टियां किसानों के मुद्दों को मुखरता से उठा रही हैं. कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष तिलकराज बेहड़ कहते हैं कि बीजेपी सरकार ने चुनाव में हार के डर के कृषि कानूनों को वापस लिया है. किसान समझदार हैं और वो बीजेपी को वोट नहीं देने वाले हैं.

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वहीं किसान आंदोलन खत्म होने से उत्साहित बीजेपी अब किसान वोट बैंक खिसकने नहीं देने के लिए पूरा जोर लगा रही है. दूसरी ओर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी आंदोलन में किसानों की शहादत सहित तमाम मुद्दों के जरिये किसानों को साधने की कोशिश कर रही है. अब देखना है कि किसान वोट बैंक को कौन सी पार्टी अपने पाले में खींचने में सफल होती है.

आपके शहर से (देहरादून)

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