अब कम होगी आफत? हरीश रावत ही रहेंगे उत्तराखंड चुनाव में बॉस, कांग्रेस का फैसला

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रवि सिसोदिया
नई दिल्ली/देहरादून. हरीश रावत के ट्वीट्स के बाद चल रहे विवाद का पटाक्षेप करते हुए कांग्रेस हाईकमान ने ऐलान कर दिया है कि उत्तराखंड विधानसभा चुनाव रावत की अगुवाई में लड़ा जाएगा. शुक्रवार को दिल्ली में हरीश रावत के साथ ही उत्तराखंड के तमाम बड़े कांग्रेसी नेताओं की बैठक होनी थी और आलाकमान को रावत की नाराज़गी को लेकर किसी नतीजे पर पहुंचना था. माना जा रहा था कि रावत की नाराज़गी नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह और कांग्रेस पार्टी उत्तराखंड के चुनाव प्रभारी देवेंद्र यादव कैंप की गतिविधियों को लेकर थी, लेकिन यादव ने इससे इनकार कर दिया है.

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से ऐन पहले नेतृत्व को लेकर उपजे विवाद को लेकर आज दिल्ली में हो रही बैठक खत्म हो गई है. बैठक के बाद कांग्रेस प्रभारी देवेंद्र यादव ने कहा है कि रावत को किसी तरह की नाराजगी उनसे नहीं थी. यादव ने कहा, ‘चुनाव के समय में कुछ छोटी मोटी बातें होती हैं, लेकिन अब सब ठीक है और सारे मसले सुलझा लिये गए हैं.’ यादव ने स्पष्ट तोर पर कहा कि हरीश रावत कैंपेन समिति के चैयरमैन हैं और वो पूरे चुनाव का कैंपेन लीड करेंगे. ‘कोई मतभेद नही हैं. जो काम करता है, काम के तरीके में फर्क हो सकता है पर हमारा ध्येय एक है.’

सीएम का चेहरा बाद में तय होगा : प्रीतम सिंह
सीएम फेस के सवाल पर हरीश रावत ने कहा चुनाव का फेस मैं रहूंगा. बैठक के बाद उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने बयान​ दिया कि हम सब लोग एक साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे. हरीश रावत कैंपेन कमेटी को लीड करेंगे. चुनाव के बाद मुख्यमंत्री का चेहरा तय होगा. सबकी जो समस्याएं थीं, वो अब दूर हो गई हैं. कांग्रेस में all properly है, भजपा पहले अपना घर देखे.

उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा ‘कोई समस्या नहीं थी. सुखद परिणाम के साथ हम उत्तराखंड में होंगे. बैठक का सार ये है कि हरीश रावत जी चुनाव का नेतृत्व करेंगे और उनके नेतृत्व में जीत हासिल करेंगे.  शुक्रवार सुबह से ही राजनीतिक गलियारों में इस बैठक को लेकर सरगर्मियां बनी हुई थीं. इस बैठक के खत्म होने के बाद एक बार फिर साबित हो गया है कि उत्तराखंड कांग्रेस में हरीश रावत कितने महत्वपूर्ण हैं और उनकी प्रेशर पॉलिटिक्स किस तरह से काम करती है.

इससे पहले उत्तराखंड में कांग्रेस के भीतर गुटबाज़ी को लेकर तूफान खड़ा हो गया था और बुधवार को हरीश रावत ने ट्विटर के ज़रिये एक तरह से प्रेशर पॉलिटिक्स करते हुए पार्टी को चेतावनी दे दी थी. इस मसले को लेकर गुरुवार को कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने रावत से फोन पर बातचीत की थी और बताया जा रहा था कि कांग्रेस की तरफ से उन्हें बड़ा भरोसा दे दिया गया था.

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