UP News: उत्तर प्रदेश ‘बीमारू’ राज्य का दर्जा खत्म कर राजस्व अधिशेष वाला राज्य बन गया, बोले सीएम योगी

UP News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में उनका राज्य ‘बीमारू’ (पिछड़े) राज्य की श्रेणी से बाहर निकलकर राजस्व अधिशेष (अतिरिक्त राजस्व वाला) राज्य बन गया है। आदित्यनाथ ने बेंगलुरू में ‘इंडस्ट्री लीडर्स रोड शो’ में निवेश के लिए जोरदार अपील की और कहा कि राज्य का बुनियादी ढांचा उत्तर प्रदेश को निवेश के लिए एक पसंदीदा जगह बनाता है। मुख्यमंत्री ने कहा, “पिछले नौ वर्षों में ‘डबल-इंजन सरकार’ की ओर से दिए गए स्थिरता और सुरक्षा के माहौल ने उत्तर प्रदेश को ‘बीमारू’ श्रेणी से बाहर निकलने में मदद की है।”

“डबल-इंजन सरकार” का मतलब केंद्र और राज्य में बीजेपी की सरकार से है। आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में, राज्य में बीजेपी सरकार उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय को तीन गुना करने में सफल रही है। उन्होंने दावा किया, “पिछले छह वर्षों से उत्तर प्रदेश राजस्व अधिशेष वाला राज्य रहा है। सबसे निचले तीन राज्यों की श्रेणी से ऊपर उठकर, उत्तर प्रदेश अब भारत की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका राज्य हर क्षेत्र में निवेश करने वाले साझीदारों को आमंत्रित करने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। आदित्यनाथ ने बताया कि 36 क्षेत्र-विशिष्ट नीतियों के साथ, उत्तर प्रदेश ने न केवल हर क्षेत्र के लिए नीति समर्थन तैयार किया है, बल्कि 75,000 एकड़ का एक व्यापक जमीन बैंक भी विकसित किया है। उन्होंने आगे कहा कि एक्सप्रेसवे के किनारे, राज्य के पास औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर विकसित करने के लिए 27 जगहों पर जमीन उपलब्ध है। इसके अलावा, बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीआईडीए) के रूप में एक भव्य औद्योगिक शहर विकसित किया जा रहा है।

उन्होंने 26 करोड़ लोगों की बड़ी आबादी पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने राज्य के मौजूदा बुनियादी ढांचा का भी जिक्र किया और कहा कि राज्य ने देश का सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे- गंगा एक्सप्रेसवे -पूरा कर लिया है, जिसे 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को समर्पित किया था। आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश भारत के ‘3एस’- सेफ्टी (सुरक्षा), स्टेबिलिटी (स्थिरता) और स्पीड (गति) -का मॉडल बन गया है, जो उद्योग के लिए तीन अहम पहलू हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने मजबूत कानून-व्यवस्था वाले राज्य के तौर पर अपनी पहचान बनाई है, उन्होंने आगे कहा कि निवेशकों को राज्य में विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा और संपर्क के साथ-साथ पारदर्शी प्रशासन संस्थाओं का बेहतरीन नेटवर्क भी मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा, “स्किल, टैलेंट, टेक्नोलॉजी और निवेश के अनुकूल नीतियां- यह पूरा औद्योगिक पारिस्थितिक तंत्र आज नए भारत और नए उत्तर प्रदेश में मौजूद है।” उन्होंने पुरानी बातों को याद किया और कहा कि नौ साल पहले उत्तर प्रदेश की छवि अच्छी नहीं थी।

उन्होंने कहा, “राज्य बिगड़ती कानून-व्यवस्था और नीतिगत गतिरोध से जूझ रहा था, जहां प्रशासन लगभग नदारद था। विकास पर शायद ही कभी चर्चा होती थी। इसे उत्तरी भारत के पिछड़े ‘बीमारू’ राज्यों में से एक माना जाता था। गिरावट ही इसकी नियति बन गई थी। इसके मुख्य आधार कृषि और एमएसएमई को नजरअंदाज कर दिया गया था।” मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भारत की ताकत को दिखाने वाली हर चीज अब उत्तर प्रदेश में मौजूद है।

आदित्यनाथ ने राज्य में कानून-व्यवस्था की बेहतरीन स्थिति का उल्लेख किया और कहा कि यहां विश्व-स्तरीय बुनियादी ढांचा, शानदार सड़क, रेल और हवाई संपर्क, वाराणसी से हल्दिया तक भारत का पहला चालू नेशनल इनलैंड वॉटरवे और दिल्ली-मेरठ के बीच पहली रैपिड रेल सेवा मौजूद है। आदित्यनाथ ने बताया कि यहां पांच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और 11 घरेलू हवाई अड्डा, दो आईआईटी, लखनऊ में एक आईआईएम, पांच कृषि विश्वविद्यालय, 89 कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) और तीन प्रतकनीकी विश्वविद्यालय हैं। उन्होंने कहा कि कृषि विकास दर, जो कभी आठ फीसदी थी, अब 18 फीसदी तक पहुंच गई है। उनके अनुसार, नौ साल पहले राज्य में लगभग 14,000 बड़ी फैक्टरियां और उद्योग थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 33,000 से ज्यादा हो गई है।

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