UP News: महिला आर्थिक सशक्तीकरण को मिलेगी नई रफ्तार, 15 विभागों के 49 संकेतकों से होगा जिलों का मूल्यांकन

UP News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और सरकारी योजनाओं में उनकी भागीदारी बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में प्रदेश के नियोजन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए वूमेन इकोनॉमिक एंपावरमेंट इंडेक्स 2.0 तैयार किया है। इसके जरिए प्रदेश के सभी जिलों में महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक भागीदारी का आकलन किया जा रहा है।

इस इंडेक्स के तहत महिलाओं की उद्यमिता, रोजगार, शिक्षा, कौशल विकास, आजीविका, सुरक्षा और आवागमन जैसी सुविधाओं में भागीदारी को मापा जाएगा। इसके लिए 15 विभागों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर 49 संकेतक निर्धारित किए गए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य यह जानना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ महिलाओं तक किस स्तर तक पहुंच रहा है और उनके आर्थिक सशक्तीकरण में कितना योगदान दे रहा है।

सरकारी योजनाओं में महिलाओं की 30 प्रतिशत भागीदारी का लक्ष्य

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 8 जुलाई 2025 को इंडेक्स के पहले संस्करण की समीक्षा के दौरान सभी विभागीय योजनाओं में महिलाओं की कम से कम 30 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। उन्होंने सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले पांच जिलों में विशेष अभियान चलाने और सभी विभागों को जेंडर एक्शन प्लान तैयार कर लागू करने के निर्देश भी दिए थे।

इसी पहल को आगे बढ़ाते हुए इंडेक्स के दूसरे संस्करण में वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ-साथ उनके वास्तविक परिणामों का भी मूल्यांकन किया जा सकेगा।

पांच क्षेत्रों के आधार पर होगा मूल्यांकन

वूमेन इकोनॉमिक एंपावरमेंट इंडेक्स में महिला सशक्तीकरण को पांच प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। इनमें शिक्षा एवं कौशल विकास को 22.4 प्रतिशत, उद्यमिता को 22.1 प्रतिशत, रोजगार को 21.9 प्रतिशत, आजीविका को 17.4 प्रतिशत और आवागमन, सुरक्षा एवं समावेशी बुनियादी ढांचे को 16.1 प्रतिशत वेटेज दिया गया है।

इसके तहत ओडीओपी, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, पीएम स्वनिधि, स्वयं सहायता समूहों, आईटीआई, पॉलीटेक्निक और रोजगार मेलों सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी का आकलन किया जा रहा है।

स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमियों की संख्या में बढ़ोतरी

इंडेक्स के आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। ग्रामीण विकास विभाग के मुताबिक, स्वयं सहायता समूहों को रिवॉल्विंग फंड उपलब्ध कराने के लक्ष्य में महिलाओं की भागीदारी वित्तीय वर्ष 2023-24 के 38 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 65.3 प्रतिशत हो गई है। वहीं, ग्रामीण परिवारों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने का अनुपात भी 24.9 प्रतिशत से बढ़कर 28 प्रतिशत पहुंच गया है।

एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत महिला उद्यमियों की संख्या 1.87 लाख से बढ़कर 2.90 लाख हो गई है। ओडीओपी प्रशिक्षण एवं टूलकिट कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी 58.2 प्रतिशत से बढ़कर 63.1 प्रतिशत दर्ज की गई। इसी तरह विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना में महिलाओं की भागीदारी 49.5 प्रतिशत से बढ़कर 63.3 प्रतिशत पहुंच गई है।

पीएम स्वनिधि में महिलाओं का डिजिटल सशक्तीकरण

महिला स्ट्रीट वेंडर्स को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ डिजिटल लेनदेन से जोड़ने के प्रयासों के भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। पीएम स्वनिधि योजना के तहत डिजिटल रूप से सक्रिय महिला लाभार्थियों का अनुपात वित्तीय वर्ष 2023-24 के 54 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 69 प्रतिशत हो गया है।

इसके अलावा, योजना के तहत तीसरी किस्त का ऋण प्राप्त करने वाली महिला लाभार्थियों का अनुपात भी 12 प्रतिशत से बढ़कर 17 प्रतिशत दर्ज किया गया है।

27 संकेतकों में सकारात्मक प्रगति

इंडेक्स में शामिल 45 संकेतकों के रुझानों के विश्लेषण में 27 में सकारात्मक प्रगति, 15 में नकारात्मक रुझान और तीन संकेतकों में स्थिति स्थिर पाई गई है। एमएसएमई विभाग के सभी पांच संकेतकों में सकारात्मक परिणाम दर्ज किए गए। वहीं, शहरी विकास विभाग के तीनों और संस्थागत वित्त विभाग के दोनों संकेतकों में भी सुधार देखने को मिला है।

जिलों की रैंकिंग से तय होगी सुधार की दिशा

योगी सरकार इस इंडेक्स के माध्यम से जिलावार प्रदर्शन की तुलना कर कमजोर क्षेत्रों की पहचान करने पर जोर दे रही है। इसके लिए विभागीय नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, नियोजन विभाग के प्लेटफॉर्म पर डैशबोर्ड और अलग-अलग क्षेत्रों के लिए जेंडर एक्शन प्लान तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।

परिवहन और व्यावसायिक शिक्षा जैसे क्षेत्रों के लिए विशेष कार्ययोजनाएं भी विकसित की जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य महिलाओं को केवल सरकारी योजनाओं का लाभार्थी बनाने तक सीमित न रखते हुए उन्हें रोजगार, स्वरोजगार, उद्यमिता, कौशल विकास और आर्थिक निर्णयों में सक्रिय भागीदारी के अवसर उपलब्ध कराना है।

नियमित रूप से आंकड़ों की समीक्षा और जिलों के प्रदर्शन का विश्लेषण कर सरकार योजनाओं की कमियों को दूर करने और महिला आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में प्रभावी कदम उठाने की तैयारी कर रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *