UP News: उत्तर प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुशल मानव संसाधन का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में योगी सरकार ने एक बड़ी पहल की है। राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लखनऊ स्थित लोक भवन में ₹1,725 करोड़ की लागत से तैयार होने वाली ‘सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र विकास योजना’ की शुरुआत की। इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को आधुनिक तकनीकी कौशल से लैस कर देश और विदेश में रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने योजना के आधिकारिक पोर्टल का उद्घाटन किया। साथ ही, इसके पहले चरण में गोरखपुर, लखनऊ, कानपुर, झांसी और गौतमबुद्ध नगर में कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्रों की आधारशिला रखी गई।
समारोह में एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शुरू की गई यह परियोजना प्रदेश के युवाओं को रोजगार और उद्योगों को कुशल कर्मचारी उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएगी। योजना के तहत उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों को नौ रोजगार क्षेत्रों में बांटकर ‘हब एंड स्पोक मॉडल’ पर काम किया जाएगा। इसका मकसद ग्रामीण इलाकों से लेकर बड़े शहरों तक के युवाओं को कौशल विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।
इस योजना में शैक्षणिक पृष्ठभूमि के आधार पर किसी तरह का भेदभाव नहीं होगा। कला, वाणिज्य, आईटीआई और इंजीनियरिंग समेत विभिन्न क्षेत्रों के अभ्यर्थियों को उनकी क्षमता और रुचि के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाएगा। युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक्स और डेटा साइंस जैसी नई तकनीकों के साथ भारतीय एवं विदेशी भाषाओं का भी प्रशिक्षण मिलेगा। इससे उन्हें बहुराष्ट्रीय कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय रोजगार बाजार में अपनी जगह बनाने में मदद मिलेगी।
पीपीपी मॉडल पर विकसित होंगे आधुनिक कौशल केंद्र
परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट एंड ट्रांसफर (डीबीएफओटी) मॉडल लागू किया जाएगा। शुरुआती चरण के केंद्रों का निर्माण एमएसएमई विभाग, गीडा, ग्रेटर नोएडा, यीडा और बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) के सहयोग से कराया जाएगा।
परियोजना की प्रगति और गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए अलग-अलग स्तरों पर निगरानी समितियां बनाई गई हैं। चयनित मास्टर डेवलपर को तीन साल के भीतर निर्माण कार्य पूरा करना होगा। इसके अलावा, प्रशिक्षण केंद्रों तक पहुंच आसान बनाने के लिए उन्हें चार लेन वाली सड़कों के माध्यम से प्रमुख राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों से जोड़ा जाएगा।
प्रशिक्षण के साथ रोजगार की भी होगी व्यवस्था
इन केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त किया जाएगा। यहां आवासीय हॉस्टल, स्मार्ट क्लासरूम, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं और प्लेसमेंट सेल की सुविधा उपलब्ध होगी। सेवायोजन कार्यालय भी स्थापित किए जाएंगे, ताकि युवाओं को प्रशिक्षण पूरा करने के बाद कंपनियों में नौकरी पाने के लिए अलग-अलग जगह भटकना न पड़े।
योजना में स्वरोजगार को भी प्राथमिकता दी गई है। अपना कारोबार शुरू करने के इच्छुक युवाओं को प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) और मुद्रा योजना के जरिए ऋण उपलब्ध कराने के साथ टूलकिट सहायता देने की व्यवस्था की जाएगी।
लाभार्थियों को ऋण स्वीकृति पत्र और टूलकिट वितरित
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को ऋण स्वीकृति के चेक और टूलकिट प्रदान किए। इसमें एमएसएमई, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना, एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) और विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के लाभार्थी शामिल रहे।
एमएसएमई योजना के तहत ऋण सहायता:
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कृष्णा मेटल इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अमन अग्रवाल को तकनीकी उन्नयन के लिए 5 लाख रुपये दिए गए।
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श्रीराम प्लास्टिक की अंजना धवन और गोमती हेल्दी न्यूट्रिशन के कुणाल बत्रा को 5-5 लाख रुपये की सहायता मिली।
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सुल्तानपुर की आरआर एग्रो इंडस्ट्रीज के अजीत साहू को 20.17 लाख रुपये स्वीकृत किए गए।
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बरेली की सिरमौर डिटर्जेंट प्राइवेट लिमिटेड के प्रभजोत सिंह को 63 लाख रुपये का ऋण दिया गया।
मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना के लाभार्थी:
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नेहा फ्लावर डेकोरेशन की नेहा कुमारी और रामा डिजिटल लाइब्रेरी के बलवीर यादव को 5-5 लाख रुपये मिले।
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बुटीक कारोबार के लिए विजय लक्ष्मी श्रीवास्तव को 4 लाख और अंजली गुप्ता को 5 लाख रुपये दिए गए।
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वेब डेवलपमेंट एवं आईटी सेवाओं के लिए वासुदेव वाजपेयी को 5 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई।
वहीं, ओडीओपी योजना के अंतर्गत चिकनकारी उत्पाद से जुड़े कमलेश गुप्ता, रायबरेली के काष्ठ कला उद्यमी दिलीप कुमार और बाराबंकी की वस्त्र उत्पादक नीलम को प्रोत्साहित किया गया। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत सीतापुर की संगीता और सुधाकर शर्मा को टूलकिट वितरित की गई।
आठ संस्थानों के साथ कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के लिए समझौते
कार्यक्रम का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू एमएसएमई विभाग और आठ प्रमुख औद्योगिक एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान रहा। इन समझौतों के जरिए युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के मुताबिक प्रशिक्षण देने और उनके लिए रोजगार एवं प्लेसमेंट के अवसर तैयार करने पर जोर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री की उपस्थिति में विभाग के आयुक्त एवं निदेशक के. विजेंद्र पांडियन ने टाटा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल्स, अशोक लीलैंड, बीवीजी ग्रुप, पीटीसी इंडस्ट्रीज, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीआईपीईटी), एशियन डेवलपमेंट बैंक, अवाडा ग्रुप और मिंडा के प्रतिनिधियों के साथ एमओयू का आदान-प्रदान किया।
इस अवसर पर टीसीएस आईओएन एवं एजुकेशन बिजनेस के प्रमुख वी. रामास्वामी, अशोक लीलैंड के उपाध्यक्ष शक्ति सिंह, बीवीजी ग्रुप के चीफ ग्रोथ ऑफिसर जितेंद्र वालिया, पीटीसी इंडस्ट्रीज की चेयरमैन एवं एमडी स्मिता अग्रवाल, सीआईपीईटी के विवेक कुमार, एशियन डेवलपमेंट बैंक के केंजी ग्रोनुमा, अवाडा ग्रुप के अनुराग चोखानी और मिंडा की सीएसआर स्टेट हेड इशिता धर भी मौजूद रहीं।
इस पहल के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य युवाओं को केवल डिग्री तक सीमित न रखकर उन्हें उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित करना है, ताकि प्रदेश के प्रतिभाशाली युवाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के अधिक अवसर मिल सकें।