UP News: उत्तर प्रदेश में युवाओं को रोजगार पाने वाले के साथ-साथ रोजगार देने वाला उद्यमी बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लागू की गई नीतियों, आर्थिक सहायता और संस्थागत सुविधाओं से प्रदेश का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से विस्तार कर रहा है। भारत सरकार के पास पंजीकृत स्टार्टअप्स की संख्या 24 हजार के पार पहुंचने के साथ उत्तर प्रदेश देश का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है। वहीं, ‘स्टार्ट-इन-यूपी’ के तहत 3,500 से अधिक स्टार्टअप पंजीकृत हैं।
प्रदेश में नवाचार और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 15 जुलाई 2020 को उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2020 लागू की थी। इसके जरिए 10 हजार स्टार्टअप तैयार करने और प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में कम से कम 100 इन्क्यूबेटर्स का नेटवर्क विकसित करने का लक्ष्य रखा गया। स्टार्टअप क्षेत्र की बदलती जरूरतों और युवाओं की बढ़ती रुचि को देखते हुए 9 नवंबर 2022 को इस नीति में पहला संशोधन किया गया, ताकि नए उद्यम शुरू करने वालों को बेहतर सुविधाएं और प्रोत्साहन मिल सकें।
डीप-टेक और नई तकनीकों पर सरकार का जोर
प्रदेश सरकार अब स्टार्टअप की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ अनुसंधान और आधुनिक तकनीक पर आधारित उद्यमों को भी प्रोत्साहित कर रही है। इसी उद्देश्य से आठ अत्याधुनिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की योजना बनाई गई है।
इस योजना के तहत मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स एवं हेल्थ टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में आईआईटी कानपुर के नोएडा परिसर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित कर उनका संचालन शुरू हो चुका है।
इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग, मेडिटेक, ड्रोन, 5जी/6जी, दूरसंचार, ब्लॉकचेन और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सात अन्य सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को मंजूरी दी गई है। इन केंद्रों से युवाओं, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों को नई तकनीकों पर आधारित उत्पाद और व्यवसाय विकसित करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
स्टार्टअप नीति-2026 से उद्यमियों को मिलेंगी नई सुविधाएं
स्टार्टअप नीति-2020 के पांच वर्ष पूरे होने के बाद सरकार ने तकनीकी विकास और औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप नई स्टार्टअप नीति-2026 तैयार की। इसे 10 जुलाई 2026 को अधिसूचित किया गया। इसके साथ ही स्टार्टअप और इन्क्यूबेशन से जुड़ी गतिविधियों को व्यवस्थित तथा प्रभावी बनाने के लिए उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन निदेशालय की स्थापना के प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिली है।
प्रदेश में डीप-टेक आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए नोएडा और लखनऊ में ‘यू-हब (डीप-टेक हब)’ विकसित करने की योजना को भी स्वीकृति दी गई है। इन केंद्रों के माध्यम से तकनीकी अनुसंधान, निवेश और स्टार्टअप संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर दिया जाएगा।
स्टार्टअप और इन्क्यूबेटर्स को 38 करोड़ रुपये से अधिक की मदद
प्रदेश में नए उद्यमों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार विभिन्न योजनाओं के जरिए आर्थिक सहायता दे रही है। अब तक 150 स्टार्टअप्स को भरण-पोषण भत्ते के रूप में 123.14 लाख रुपये दिए गए हैं। वहीं, 440 स्टार्टअप्स को सीड कैपिटल और मार्केटिंग सहायता के लिए 1,457.425 लाख रुपये तथा 111 स्टार्टअप्स को प्रोटोटाइप विकसित करने के लिए 539.86 लाख रुपये उपलब्ध कराए गए हैं।
इन्क्यूबेटर्स को भी आर्थिक सहयोग दिया गया है। इसके तहत 59 इन्क्यूबेटर्स को परिचालन खर्च के लिए 1,347.54 लाख रुपये और 16 इन्क्यूबेटर्स को पूंजीगत अनुदान के रूप में 365.56 लाख रुपये मिले हैं। इस तरह स्टार्टअप्स और इन्क्यूबेटर्स को कुल 3,833.525 लाख रुपये यानी करीब 38.34 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है।
27 अगस्त 2026 को आयोजित ‘उत्तर प्रदेश स्टार्टअप इकोसिस्टम’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 107 स्टार्टअप्स को 3.42 करोड़ रुपये से अधिक और नौ इन्क्यूबेटर्स को 1.79 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन वितरित किए। कार्यक्रम के दौरान ‘यूपी स्टार्टअप मिशन’ वेबसाइट भी लॉन्च की गई, जिसके जरिए उद्यमियों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है।
महिला उद्यमी भी बढ़ा रहीं स्टार्टअप इकोसिस्टम की ताकत
उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के पास पंजीकृत स्टार्टअप्स में 11 हजार से अधिक ऐसे उद्यम हैं, जिनका नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं। यह प्रदेश में महिला उद्यमिता और आर्थिक भागीदारी के विस्तार को दर्शाता है।
इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के 48 स्टार्टअप्स को भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) के माध्यम से वित्तीय सहायता मिल रही है। प्रदेश में फिलहाल 88 सरकारी मान्यता प्राप्त इन्क्यूबेटर्स सक्रिय हैं। ये संस्थान आईटी, फिनटेक, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कृषि और सामाजिक विकास जैसे क्षेत्रों में नए कारोबार को मार्गदर्शन, तकनीकी सहायता और व्यावसायिक सहयोग उपलब्ध करा रहे हैं।
राष्ट्रीय स्टार्टअप रैंकिंग में भी यूपी को पहचान
सरकारी नीतियों, वित्तीय प्रोत्साहन, तकनीकी संस्थानों के सहयोग और नवाचार आधारित पहलों के चलते उत्तर प्रदेश ने देश के स्टार्टअप परिदृश्य में अपनी स्थिति मजबूत की है। DPIIT की वार्षिक स्टार्टअप रैंकिंग में प्रदेश को ‘टॉप परफॉर्मर’ श्रेणी में जगह मिली है।
सरकार का जोर अब मौजूदा स्टार्टअप नेटवर्क को और व्यापक बनाने के साथ डीप-टेक, अनुसंधान और आधुनिक तकनीक आधारित कारोबार को प्रोत्साहित करने पर है। इसके जरिए उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख नवाचार और उद्यमशीलता केंद्रों में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।