Prayagraj: प्रयागराज में दुर्गा पूजा उत्सव की तैयारियां तेज, बन रहा ‘बाई का बाग’ का पंडाल

Prayagraj:  उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में दुर्गा पूजा उत्सव के लिए भव्य और आकर्षक पंडाल तैयार किए जा रहे हैं। इनमें से एक में शहर से हजारों किलोमीटर दूर स्थित केरलम की भव्य मंदिर वास्तुकला की झलक देखने को मिलेगी। प्रयागराज की ‘बाई का बाग बारवारी दुर्गा पूजा समिति’ ने अपने 100वें साल के सांस्कृतिक सफर को यादगार बनाने के लिए पूजा पंडाल को मशहूर पद्मनाभस्वामी मंदिर का रूप दिया है।

पंडाल के मुख्य द्वार पर दो विशालकाय हाथी, नक्काशीदार खंभे और अंदर छिपे ‘रहस्यमयी खजाने’ वाले कक्ष का पूरा माहौल तैयार किया जा रहा है, वहीं बाहरी हिस्से को सुनहरे रंग से निखारा जा रहा है।

बाई का बाग बारवारी दुर्गा पूजा कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष टी. पी. मिश्रा ने बताया कि “यह इस बार पंडाल हम लोग केरल के पद्मनाभस्वामी मंदिर जो कि बहुत प्रसिद्ध है। जिसमें की सात दरवाजे हैं। छह दरवाजे खुले हैं एक दरवाजा बंद है। जैसे कही थी दी जा रही है जैसे वहां पर है और लगभग डेढ़ महीना यानी कि 45 दिन हो गए हैं इस पंडाल को बनाते हुए और 20 से 25 कारीगर लगातार इसमें लगे हुए हैं। इसमें फोम कटिंग का बेस बनाया जा रहा है। इसमें फोम कटिंग आती है। फोम जो होता है जैसे थर्मोकोल होता है, उसी तरह फोम आता है। उसी की कटिंग के लिए कारीगर बाहर से आए हुए थे।”))

वास्तविक मंदिर पत्थर से बना है। हालांकि कोलकाता से आए कारीगर इसकी प्रतिकृति थर्माकोल और फोम से तैयार कर रहे हैं। वे मंदिर के बारीक डिजाइनों को हूबहू बनाने के लिए फोम की शीट को काट रहे हैं, उनकी परतें जमा रहे हैं और उन पर नक्काशी कर रहे हैं।

मुख्य मूर्तिकार व शिल्पकार सूर्यकांत मलाकार ने बताया कि “हम लोग जो है कोलकाता से आए हैं। 25 कारीगर पहले आया था स्ट्रकचर बनाने में। उसके बाद से जो है ये जो नक्काशी काटने में जो है स्पेशल जो है चार कारीगर बुलाया गया था उसमें का दो चला गया। दो अभी तक कर रहा है। ये जो है कम से कम जो नक्काशी वाला काम है, ये डेढ़ महीने से चालू है उसके पहले एक महीना स्ट्रकचर बना।”

देश भर में मनाए जाने वाले दुर्गा पूजा उत्सव को अपने शानदार पंडालों के लिए जाना जाता है। कई पूजा कमेटियां अपने पंडालों के लिए देश और विदेशों की मशहूर जगहों की प्रतिकृति बनवाने का काम कारीगरों को सौंपती हैं और ये सुनिश्चित करती हैं कि दिखने में वो हूबहू वास्तविक जगह जैसी ही दिखे, भले ही इसे बनाने में हफ्तों का वक्त लगे या फिर कई महीनों का।

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