CM Yogi: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग करने वाले मुस्लिम धर्मगुरुओं और संगठनों पर निशाना साधते हुए कहा कि सनातन परंपरा में गाय को ‘मां’ के रूप में पूजा जाता है और वो “हमारे लिए कोई जानवर नहीं है”।
योगी आदित्यनाथ ने बिजनौर में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “अगर आप गौ माता को जानवर कहते हैं तो आपकी सोच पशुवत है।” उन्होंने कहा, “गाय हमारी मां है। वह सिर्फ एक जानवर नहीं है। अगर आप हमारी गौ माता को जानवर कहते हैं तो आपकी मानसिकता पशुवत है… गौ माता हमारी ‘राष्ट्र माता’ हैं। इसके लिए किसी औपचारिक घोषणा की आवश्यकता नहीं है… ठीक वैसे ही जैसे हम अपनी मां और गंगा का सम्मान करते हैं।”
मुख्यमंत्री ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदानी और कुछ अन्य मुस्लिम समूहों द्वारा गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने की हालिया मांगों का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणियां पाखंड से भरी हैं क्योंकि यही लोग “गौ वध को बढ़ावा देते हैं”। मुख्यमंत्री ने कहा, “आजकल कई मौलवी और मौलाना गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग कर रहे हैं। हम कहते हैं कि गाय हमारी माता है और हमारा रिश्ता जन्म-जन्मांतर का है।”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सनातन परंपरा में गाय का एक पूजनीय स्थान है। “ऐसी मांगें करने वाले लोग दोहरा मापदंड अपना रहे हैं, क्योंकि एक तरफ तो वे गाय को मान्यता दिलाने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वे गौहत्या का समर्थन कर रहे हैं।” मुख्यमंत्री ने कहा कि “अक्रांतों को गाय का दर्जा सिखाने की कोई जरूरत नहीं थी।” उन्होंने कहा, “हमारे अपने मूल्य और परंपराएं हैं। हमने हमेशा गाय को मां के समान माना है।”
उन्होंने आगे कहा कि गाय पहले से ही “स्वयं घोषित राष्ट्र माता” है और उसे किसी से औपचारिक मान्यता की जरूरत नहीं है। योगी आदित्यनाथ पाकिस्तान से विस्थापित 1,645 परिवारों, पूर्व सैनिकों और भूमि आवंटियों को भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र वितरित करने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे, मुख्यमंत्री ने पड़ोसी देशों में धार्मिक अल्पसंख्यकों की दुर्दशा पर मुस्लिम धर्मगुरुओं की चुप्पी की भी आलोचना की।
उन्होंने आरोप लगाया कि किसी भी प्रमुख मुस्लिम धार्मिक नेता ने धार्मिक उत्पीड़न के कारण पाकिस्तान और बांग्लादेश से विस्थापित लोगों के लिए आवाज नहीं उठाई है और न ही पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में हिंदुओं की घटती आबादी पर चिंता जताई। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि अगर धार्मिक नेताओं ने वक्फ के तहत कथित तौर पर रखी गई जमीन विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए दी होती, तो ये उनके दुख के प्रति सच्ची संवेदनशीलता का प्रदर्शन होता।
हाल ही में ईद-उल-अजहा के दौरान सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों का जिक्र करते हुए आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि कुछ मौलवियों के समर्थकों ने बधाई देते समय गायों की तस्वीरें साझा की थीं। उन्होंने कहा, “मैं उनसे कहना चाहता हूं कि वे ऐसे तत्वों पर लगाम लगाएं, वरना आने वाली पीढ़ियां गौ माता को हुए नुकसान के नतीजों को याद रखेंगी।”
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के सक्रिय कदमों से यह सुनिश्चित हुआ कि त्योहार और धार्मिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए। मुख्यमंत्री ने गाजियाबाद में हाल ही में हुई एक हत्या का भी जिक्र किया, जिसमें ईद के दिन एक युवक की कथित तौर पर उसके दोस्त ने चाकू मारकर हत्या कर दी थी।