1984 सिख नरसंहार को लेकर बृजलाल का कांग्रेस पर हमला, बोले- पीड़ित परिवारों से मांगे सामूहिक माफी

उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी और भाजपा के राज्यसभा सांसद बृजलाल ने 1984 के सिख नरसंहार की बरसी के अवसर पर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 31 अक्टूबर 1984 को हत्या के बाद देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय को निशाना बनाया गया। 3 नवंबर तक चले इस हिंसक दौर में हजारों निर्दोष लोगों की जान गई और उनके घरों, दुकानों तथा गुरुद्वारों में आगजनी और लूटपाट की घटनाएं हुईं।

बृजलाल ने इसे भारतीय इतिहास का ऐसा काला अध्याय बताया, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि इस हिंसा में कांग्रेस के कई प्रभावशाली नेताओं के नाम नानावती आयोग की जांच के दौरान सामने आए थे। इनमें सज्जन कुमार, जगदीश टाइटलर, कमलनाथ, एचकेएल भगत, अर्जुन दास, धर्मदास शास्त्री और ललित माकन के नाम शामिल हैं।

भाजपा सांसद ने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था, ‘जब विशाल पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है।’ बृजलाल के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व ने उस समय हिंसा के पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता नहीं दिखाई और दोषियों के खिलाफ समय पर प्रभावी कार्रवाई करने की जिम्मेदारी भी नहीं निभाई।

दिल्ली में 2,733 और देशभर में 3,350 सिखों की मौत का दावा

बृजलाल ने 1984 की हिंसा में मारे गए लोगों के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में 2,733 और देश के अन्य हिस्सों सहित कुल 3,350 सिखों की हत्या हुई थी। वहीं, कुछ गैर-सरकारी मानवाधिकार संगठनों ने मृतकों की संख्या 8,000 से 17,000 के बीच बताई थी।

उन्होंने कानपुर की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां सरकारी आंकड़ों में 127 सिखों की हत्या दर्ज की गई थी। हिंसा के दौरान लोगों के घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लूटा गया तथा आग के हवाले कर दिया गया।

मोदी सरकार में SIT बनने के बाद मामलों की जांच को मिली गति

भाजपा सांसद ने कहा कि वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने 1984 के सिख नरसंहार से जुड़े मामलों की दोबारा जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। उनके मुताबिक, इसके बाद कई मामलों में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ी।

बृजलाल ने बताया कि 17 दिसंबर 2018 को दिल्ली हाईकोर्ट ने सज्जन कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके अलावा महिपालपुर में सरदार हरदेव सिंह और सरदार अवतार सिंह की हत्या के मामले में 20 दिसंबर 2018 को यशपाल सिंह को मृत्युदंड और नरेश सहरावत को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

कानपुर सिख दंगों में 1,251 मामले जांच के लिए चिह्नित

उत्तर प्रदेश में कानपुर के सिख दंगों से जुड़े मामलों की जांच के बारे में बृजलाल ने बताया कि वर्ष 2019 में तत्कालीन डीजीपी अतुल की अगुवाई में एसआईटी गठित की गई थी। जांच के दौरान कुल 1,251 मामलों को चिह्नित किया गया, जिनमें से 40 को गंभीर और जघन्य श्रेणी का पाया गया।

उन्होंने कहा कि एसआईटी ने 96 मुख्य आरोपियों की पहचान की थी। इनमें से 22 आरोपियों की मृत्यु हो चुकी थी। शेष आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में कानूनी प्रक्रिया जारी है।

रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली पर भी उठाए सवाल

दिल्ली के रामलीला मैदान में एक नवंबर को कांग्रेस की प्रस्तावित रैली पर सवाल उठाते हुए बृजलाल ने कहा कि यह दिन 1984 की हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों और उनके परिवारों को याद करने का है। उनके अनुसार, नरसंहार के 42 साल बाद भी पीड़ित परिवार उस दर्द से उबर नहीं पाए हैं।

उन्होंने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से मांग की कि पार्टी को 1984 के सिख नरसंहार के लिए पीड़ित परिवारों से सार्वजनिक रूप से सामूहिक माफी मांगनी चाहिए। बृजलाल ने कहा कि हिंसा में मारे गए निर्दोष लोगों और उनके परिजनों को न्याय तथा सम्मान मिलना चाहिए।

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