Asian Games: भारतीय पैरा एथलेटिक्स के मुख्य कोच सत्यनारायण का मानना है कि पैरा एशियाई खेलों में महिलाओं की चक्का फेंक एफ54 स्पर्धा में भारत की सुवर्णा राज का स्वर्ण पदक जीतना, उनके 15-16 सालों के समर्पण और बुलंद हौसले का नतीजा है। उन्होंने इस उपलब्धि को टीम के लिए गर्व का क्षण और सुवर्णा के लिए एक व्यक्तिगत मील का पत्थर बताया।
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा की रहने वाली 44 साल की सुवर्णा ने गुरुवार को जापान के नागोया में 15.66 मीटर के अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ स्वर्ण पदक जीता। सुवर्णा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने छह प्रयासों में से चार में 15 मीटर से अधिक का थ्रो किया। उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल किया। ईरान की शाहला हदीदी 15.45 मीटर के साथ दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि वियतनाम की थी न्गोक थुई गुयेन ने 14.65 मीटर के साथ कांस्य पदक जीता। कोच सत्यनारायण ने कहा, “सुवर्णा राज 2010-2011 से एथलेटिक्स से जुड़ी हुई हैं। आप इस पदक के पीछे के संघर्ष का अंदाजा लगा सकते हैं, जो 15 से 16 वर्षों के समर्पण के बाद मिला है। वह पहले भी दो एशियाई खेलों में हिस्सा ले चुकी हैं, और तमाम चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपना प्रशिक्षण जारी रखा।”
उन्होंने आगे कहा, “कई लोगों को सुवर्णा राज के धैर्य और लगन से सीखना चाहिए। मैं आज उनके लिए बेहद खुश हूं। यह पदक उनके परिवार की कड़ी मेहनत को भी दर्शाता है।” कोच ने स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया, भारत सरकार, पैरालंपिक कमिटी ऑफ इंडिया, सुवर्णा के परिवार, दोस्तों और उन सभी लोगों को धन्यवाद दिया जिन्होंने उनके इस सफर में उनका साथ दिया। वहीं सुवर्णा ने कहा कि सालों तक जिस लक्ष्य का पीछा किया, उसे हासिल करने के बाद अपनी भावनाओं को शब्दों में बयां करना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा, “आज मेरा सपना सच हो गया है, और सच कहूं तो, अभी भी यह किसी सपने जैसा ही लग रहा है। यह मेरा सबसे बड़ा लक्ष्य था, और आज आखिरकार मैंने इसे हासिल कर लिया है।”
उन्होंने आगे कहा, “यह पदक सिर्फ मेरा नहीं है, यह पूरे भारत का है। मैं इसे उन सभी लोगों को समर्पित करना चाहती हूं जो मेरे साथ खड़े रहे और जिन्होंने मुझे इस मुकाम तक पहुंचने में मदद की।” सुवर्णा ने पैरालंपिक कमिटी ऑफ इंडिया, स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया और उन सभी लोगों का भी धन्यवाद किया जिन्होंने उनके करियर के दौरान उनका समर्थन किया। सत्यनारायण ने पैरालंपिक कमिटी ऑफ इंडिया, इसके पदाधिकारियों और भारतीय दल की ओर से एथलीट को बधाई दी।
व्हीलचेयर का उपयोग करने वाली सुवर्णा 2017 में इस खेल से जुड़ी और तब से उन्होंने पिंटू नागर के मार्गदर्शन में लगातार कड़ी मेहनत की है। वह अभी तक तीन एशियाई पैरा खेलों और कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी है। वह चक्का फेंक की एफ54 श्रेणी में एशिया में दूसरे स्थान पर हैं। सुवर्णा ने 17वीं फज्जा इंटरनेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 में महिलाओं के चक्का फेंक एफ54/55 में कांस्य पदक जीता था। उन्होंने इस साल जनवरी में ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा ट्रैक मीट में चक्का फेंक में स्वर्ण और शॉट पुट में रजत पदक जीता था।
एथलेटिक्स के अलावा सुवर्णा ‘एक्सेसिबिलिटी स्पेशलिस्ट’ और दिव्यांगता अधिकार अधिवक्ता के रूप में काम करती हैं। उन्हें 2015 में खेल मंत्रालय ने राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से सम्मानित किया था। वह चुनाव आयोग की ब्रांड एंबेसडर के रूप में भी कार्य कर चुकी हैं। सरकार की वार्षिक प्रशिक्षण एवं प्रतियोगिता योजना (एसीटीसी) के तहत उनके अभ्यास और प्रतियोगिता संबंधी खर्चों को 7,70,607 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। एफ54 श्रेणी उन खिलाड़ियों के लिए है जिनके धड़ और निचले हिस्से के अंग सक्षम नहीं होते हैं और वह व्हीलचेयर पर बैठकर थ्रो करते हैं। एथलीट अपने शरीर के ऊपरी हिस्से की ताकत और बांहों की गति का उपयोग करके शक्ति पैदा करते हैं।