भाजपा ने पंचायत चुनावों में ओबीसी कोटा के लिए राज्यपाल से हस्तक्षेप की अपील की

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डिजिटल डेस्क, भुवनेश्वर। ओडिशा भाजपा के तीन विधायकों सहित एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को राज्यपाल गणेशी लाल से मिलकर राज्य में होने वाले आगामी पंचायत चुनावों में ओबीसी समुदाय के लिए सीटों के आरक्षण के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की। भाजपा विधायक ललितेंदु विद्याधर महापात्र, मुकेश महालिंग और सनातन बिजुली द्वारा हस्ताक्षरित एक ज्ञापन राज्यपाल को सौंपा गया। महापात्र ने कहा कि भले ही राज्य की लगभग 54 प्रतिशत आबादी ओबीसी श्रेणी की है, लेकिन राज्य सरकार ने पंचायती राज संस्थानों (पीआरआई) में आरक्षण नहीं देकर उन्हें वंचित कर दिया।

उन्होंने कहा, हमने राज्यपाल से तीन स्तरीय पंचायत चुनाव नहीं कराने का अनुरोध किया है, जब तक कि ग्रामीण निकायों में ओबीसी के लिए सीटों का आरक्षण नहीं हो जाता। भाजपा विधायकों ने ज्ञापन में कहा कि संविधान एससी, एसटी और ओबीसी की उन्नति और पर्याप्त प्रतिनिधित्व को अनिवार्य करता है। स्थानीय स्वशासन में ओबीसी का पर्याप्त प्रतिनिधित्व का उद्देश्य सत्ता के विकेंद्रीकरण और शासन को जमीनी स्तर तक ले जाना है।

उन्होंने आरोप लगाया कि ओबीसी को आरक्षण दिए बिना पंचायत चुनाव के लिए ओडिशा सरकार का कदम आगे बढ़ाना संवैधानिक उद्देश्य और ओबीसी के पर्याप्त प्रतिनिधित्व की मंशा के विपरीत है। ज्ञापन में कहा गया है, यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है कि ओडिशा सरकार ओबीसी को आरक्षण दिए बिना पंचायत चुनाव कराने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रही है। इस तरह के चुनाव ओबीसी समुदाय से संबंधित व्यक्तियों को पांच साल तक अधिकार से वंचित कर देंगे। सरकार का यह कदम पिछड़े वर्गो के लिए गंभीर पूर्वाग्रह पैदा करता है।

यह कहते हुए कि एक ऐसा ही मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, भाजपा विधायकों ने कहा कि केंद्र सरकार इस मामले से चिंतित होने के कारण पहले ही 27 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक समीक्षा याचिका दायर कर चुकी है, ताकि स्थानीय निकाय चुनाव में ओबीसी के लिए राजनीतिक आरक्षण की अनुमति दी जा सके। विधायकों ने राज्यपाल से राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) के समक्ष इस मुद्दे को उठाने का अनुरोध किया, ताकि संवैधानिक तंत्र के माध्यम से ओबीसी को आरक्षण सुनिश्चित कर पंचायत चुनाव कराया जा सके।

(आईएएनएस)

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