Kolkata: तालाब कभी पश्चिम बंगाल के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा हुआ करते थे। लेकिन तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण अब ये धीरे-धीरे गायब होते जा रहे हैं। इसी मुद्दे पर लोगों का ध्यान खींचने के लिए कोलकाता में दुर्गा पूजा का एक खास पंडाल तैयार किया जा रहा है।
तेलीपुकुर की ‘जुबा संघ’ समिति ने 2026 के लिए अपने पंडाल की थीम ‘एक पुकुर भालोबासा’ रखी है। इसका मतलब है ‘प्यार से भरा तालाब’। कलाकार भाबतोष सरकार की सोच पर आधारित ये पंडाल पारंपरिक तालाबों और लोगों की जिंदगी में उनकी अहमियत को दिखाएगा।
इस पंडाल में मां दुर्गा को प्रकृति के प्रतीक के रूप में दिखाया गया है। उनके आगमन को जीवन और नई ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। पंडाल में चारकोल से बनी कलाकृतियां भी लगाई गई हैं, जो इसे खास बनाती हैं।
इस थीम के जरिए शहरों के तेजी से फैलने से तालाबों और नदियों पर पड़ने वाले असर को दिखाया गया है। साथ ही, लोगों को इन जल स्रोतों को बचाने और उनके संरक्षण के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया गया है।
कला और पर्यावरण के संदेश से सजा यह पंडाल लोगों को तालाबों से जुड़ी बचपन की यादें ताजा करने का मौका देता है। साथ ही, यह सोचने पर भी मजबूर करता है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण हमारे आसपास का वातावरण किस तरह बदल रहा है।