Kedarnath: केदारनाथ यात्रा 2026 ने इस बार आस्था और श्रद्धा के नए रिकॉर्ड कायम कर दिए हैं, बाबा केदार के कपाट खुलने के महज 35 दिनों के भीतर ही 9 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। हर दिन करीब 30 हजार भक्त धाम पहुंच रहे हैं। भारी भीड़, लंबे ट्रैफिक जाम और 16 किलोमीटर की कठिन पैदल चढ़ाई से बचने के लिए अब ज्यादातर श्रद्धालु हवाई यात्रा का विकल्प चुन रहे हैं। अगर आप भी आरामदायक और कम समय में बाबा के दर्शन करना चाहते हैं, तो दिल्ली और देहरादून से केदारनाथ पहुंचने के हवाई रूट, खर्च और सुविधाओं की पूरी जानकारी यहां जानिए।
दिल्ली से देहरादून तक फ्लाइट यात्रा
केदारनाथ की हवाई यात्रा आमतौर पर दिल्ली से शुरू होती है। दिल्ली से देहरादून के लिए कई सीधी फ्लाइट्स उपलब्ध हैं, जिससे सफर बेहद आसान हो जाता है। यात्रा समय: लगभग 50 मिनट से 1 घंटा 10 मिनट , खर्च: एडवांस बुकिंग करने पर राउंड ट्रिप टिकट करीब ₹6,800 से ₹7,800 प्रति व्यक्ति तक पड़ सकता है।
देहरादून से केदारनाथ पहुंचने के हवाई विकल्प देहरादून पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं के पास केदारनाथ धाम तक पहुंचने के लिए दो प्रमुख विकल्प मौजूद हैं।
बेस कैंप से हेलीकॉप्टर सेवा
देहरादून एयरपोर्ट से सड़क मार्ग के जरिए श्रद्धालु गुप्तकाशी, सिरसी और फाटा जैसे प्रमुख हेलीपैड तक पहुंच सकते हैं। यहां से नियमित हेलीकॉप्टर सेवाएं संचालित होती हैं।प्रमुख हेलीपैड गुप्तकाशी, सिरसी और फाटा, उड़ान समय मंदिर तक पहुंचने में सिर्फ 10 से 15 मिनट, खर्च रिटर्न
टिकट का किराया लगभग ₹5,500 से ₹8,500 प्रति व्यक्ति
जरूरी सूचना हेलीकॉप्टर टिकट बुकिंग में धोखाधड़ी से बचने के लिए केवल IRCTC की आधिकारिक हेलीयात्रा वेबसाइट से ही टिकट बुक करें।
देहरादून से डायरेक्ट चार्टर सेवा
अगर आप पूरी तरह प्रीमियम और बिना किसी इंतजार वाला सफर चाहते हैं, तो देहरादून से सीधे प्राइवेट चार्टर सेवा का विकल्प चुन सकते हैं। इस सेवा के जरिए श्रद्धालु सीधे केदारनाथ पहुंच सकते हैं। कई चार्टर कंपनियां चारधाम यात्रा (यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ) के साथ-साथ दोधाम यात्रा के कस्टमाइज्ड पैकेज भी उपलब्ध कराती हैं।
केदारनाथ मंदिर और भीम शिला
12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल बाबा केदार का यह भव्य मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। मंदिर के पीछे स्थित भीम शिला को 2013 की विनाशकारी बाढ़ के दौरान मंदिर की रक्षा का प्रतीक माना जाता है।
आदि शंकराचार्य समाधि – मुख्य मंदिर के पीछे स्थित यह पवित्र स्थान वह जगह है जहां आदि शंकराचार्य ने मात्र 32 वर्ष की आयु में समाधि ली थी।मुख्य मंदिर से लगभग 500 मीटर दूर स्थित यह मंदिर केदारनाथ के रक्षक देवता के रूप में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि सर्दियों में कपाट बंद होने के बाद भैरवनाथ पूरे क्षेत्र की रक्षा करते हैं।
मंदिर परिसर से करीब 2 किलोमीटर दूर बनी यह ध्यान गुफा उस समय चर्चा में आई थी, जब साल 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां करीब 17 घंटे ध्यान किया था।
यात्रा से पहले ध्यान रखें ये बातें लीकॉप्टर टिकट समय से पहले बुक करे मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा शुरू करें गर्म कपड़े और जरूरी दवाइयां साथ रखे यात्रा पंजीकरण जरूर कराएं अगर आप भी इस बार बाबा केदार के दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो हवाई सफर आपके लिए समय बचाने के साथ-साथ आरामदायक और सुरक्षित विकल्प साबित हो सकता है।