Women Quota Law: लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक गिरने के बाद, एनडीए की महिला सांसदों ने शुक्रवार को संसद परिसर में धरना दिया। उन्होंने विपक्ष के खिलाफ नारे लगाये और उस पर महिला सशक्तिकरण में बाधा डालने का आरोप लगाया।
प्रदर्शनकारी सांसदों ने विधेयक की हार पर आक्रोश जाहिर किया और “महिलाओं का ये अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान” जैसे नारे लगाए। केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा, “इस देश की महिलाएं विपक्ष को मुंहतोड़ जवाब देंगी।” बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी ने इस घटनाक्रम को महिलाओं के लिए एक बड़ा झटका बताया और कहा, “ये देश की आधी आबादी की हार है, विपक्ष ने हमें छोड़ दिया, महिलाएं उन्हें कभी माफ नहीं करेंगी।”
बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि उसने “देश की महिलाओं को धोखा दिया है” और केवल राजनीतिक लाभ के लिए काम कर रही है। ये विरोध प्रदर्शन लोकसभा में सरकार को मिले एक बड़े झटके के बीच हुआ है, जहां संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त करने में विफलता मिली।
298 सदस्यों ने विधेयक के पक्ष में मतदान किया, जबकि 230 ने इसके विरोध में मतदान किया। उपस्थित और मतदान करने वाले 528 सदस्यों में से विधेयक को पारित होने के लिए कम से कम 352 मतों की जरूरत थी।
प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य 2029 के संसदीय चुनावों से पहले विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण को लागू करना था, साथ ही 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करना था। राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के लिए भी इसी प्रकार के प्रावधान प्रस्तावित किए गए थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह तथा विपक्ष के नेता राहुल गांधी मतदान के दौरान उपस्थित थे। मोदी सरकार के कार्यकाल में संसद में विधेयक के पराजित होने का ये पहला मामला है। विधेयक के पराजित होने के बाद, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया और अगली बैठक शनिवार को निर्धारित की गई।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन को सूचित किया कि सरकार परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक को आगे नहीं बढ़ाएगी, क्योंकि दोनों संविधान संशोधन विधेयक से जुड़े हुए हैं। मतदान के बाद विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि अगर सरकार महिला आरक्षण को लेकर गंभीर है, तो उसे 2023 का कानून लाना चाहिए और उन्होंने आश्वासन दिया कि विपक्ष इसका समर्थन करेगा।