PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बुनियाद, वित्तीय मजबूती और लगातार हो रहे सुधारों पर आधारित है और हमारा देश दुनिया के साथ और दुनिया के लिए विकास करता है। उन्होंने भारत को एक ऐसी वैश्विक आर्थिक और प्रौद्योगिकी शक्ति के रूप में पेश किया, जो दूसरे देशों को नुकसान पहुंचाने की बजाय उनकी समृद्धि में योगदान देना चाहता है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम किसी की कीमत पर विकास नहीं करते। हम दुनिया के साथ और दुनिया के लिए विकास करते हैं।’’ पीएम मोदी ने कहा कि भारत की बढ़ती आर्थिक और तकनीकी क्षमताएं ऐसे समय में वैश्विक चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकती हैं जब भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं और रणनीतिक संसाधनों को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।
‘ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम’ को संबोधित करते हुए उन्होंने अप्रैल-जून तिमाही में देश की 7.8 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि, 700 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार और कराधान, दिवाला तथा श्रम कानूनों से जुड़े सुधारों का उल्लेख किया और कहा कि ये भारत की मजबूती को दर्शाते हैं। मोदी ने कहा कि ‘‘अनिश्चितताओं से भरी इस दुनिया में भारत भरोसे और स्थिरता का एहसास कराता है।’’
उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था की तुलना में सबसे तेज रही और इसकी वजह ‘‘मजबूत बुनियाद’’ है। प्रधानमंत्री मोदी की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब भारत निवेश आकर्षित करने, विनिर्माण का विस्तार करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। इस बीच, सरकारें और कंपनियां उत्पादन के विभिन्न केंद्र विकसित करने और रणनीतिक निर्भरता कम करने के प्रयास कर रही हैं।
पीएम मोदी ने भारत की प्रगति को ‘दूसरों को सशक्त बनाने के लिए शक्ति’ के सिद्धांत से जोड़ते हुए कहा कि आर्थिक और प्रौद्योगिकी की ताकत का सही आकलन इस आधार पर होना चाहिए कि उसका इस्तेमाल दूसरों को नियंत्रित करने के बजाय उनके लिए अवसर पैदा करने में कितना किया जाता है। उन्होंने कहा, ‘‘आज प्रौद्योगिकी ताकत है। डेटा ताकत है। ज्ञान ताकत है। नवाचार ताकत है। हालांकि असल सवाल यह नहीं है कि ताकत किसके पास है। बल्कि सवाल यह है कि उस ताकत का इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है।’’
प्रधानमंत्री ने भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, किफायती मोबाइल डेटा, डिजिटल भुगतान और सरकारी लाभों के सीधे हस्तांतरण का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रौद्योगिकी से आर्थिक अवसरों तक लोगों की पहुंच बढ़ रही है। मोदी ने कहा कि सड़क किनारे सामान बेचने वाले छोटे विक्रेताओं से लेकर बड़े कारोबारों तक, सभी के लिए एक ही डिजिटल भुगतान व्यवस्था उपलब्ध है। उन्होंने इसे समावेशी प्रौद्योगिकी का उदाहरण बताया।
उन्होंने कहा कि भारत अपने डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का अनुभव साझेदार देशों के साथ भी साझा कर रहा है, खासकर ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के साथ। उन्होंने कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान बनाए गए ‘कोविन’ मंच का उल्लेख किया। मोदी ने इस पहल को भारत की प्रौद्योगिकी क्षमताओं को देश की सीमाओं से बाहर भी उपलब्ध कराने के व्यापक प्रयास का हिस्सा बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में स्टार्टअप की संख्या 2014 से पहले कुछ सौ थी, जो बढ़कर 2.5 लाख से अधिक हो गई है। इनमें से करीब आधे छोटे शहरों और कस्बों में स्थित हैं। 45 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप में कम से कम एक महिला निदेशक या साझेदार है।